गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। Dharamjaigarh District Demand: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सबसे पुराने और बड़े विकासखंड माने जाने वाले धरमजयगढ़ को एक बार फिर से स्वतंत्र जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इस ऐतिहासिक क्षेत्र को ‘उदयपुर स्टेट’ के नाम से जाना जाता था। मध्य प्रदेश से पृथक होकर जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था, तब से लेकर आज तक लगातार धरमजयगढ़ को प्रशासनिक जिला का दर्जा दिए जाने की मांग स्थानीय नागरिकों द्वारा की जाती रही है। राज्य निर्माण के समय शुरुआती दौर में जहां प्रदेश में केवल 13 जिले अस्तित्व में थे, वहीं वर्तमान समय में बढ़कर जिलों की संख्या 33 तक पहुंच चुकी है, परंतु धरमजयगढ़ के हिस्से में हर बार निराशा ही आई है, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में खासा रोष और उम्मीदें दोनों जुड़ी हुई हैं।
आगामी 15 नवंबर को धरमजयगढ़ में प्रदेश स्तरीय ‘जनजातीय गौरव दिवस’ का एक भव्य आयोजन प्रस्तावित है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने वाले हैं। इसी कार्यक्रम के दौरान धरमजयगढ़ क्षेत्र के तमाम वासी एकजुट होकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को आधिकारिक रूप से जिला बनाने की मांग का एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि धरमजयगढ़ भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक हर दृष्टिकोण से एक नया जिला बनने के सभी आवश्यक और अनिवार्य मापदंडों को पूरी तरह से पूरा करता है। इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यालय पहले से ही मौजूद हैं, जो इसके प्रशासनिक महत्व को और अधिक पुष्ट करते हैं।
क्षेत्रवासियों का यह भी मानना है कि अब तक सत्ता में आई हर सरकार ने जिला गठन के नाम पर केवल आश्वासन और छल ही दिया है। भौगोलिक रूप से बड़े और दूरस्थ अंचल होने के कारण आम जनता को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूर तय करनी पड़ती है, जिससे विकास की रफ्तार भी प्रभावित होती है। यही वजह है कि जनजातीय गौरव दिवस के मंच और मुख्यमंत्री के आगमन का अवसर देखकर स्थानीय लोग एक बार फिर अपनी पुरानी और जायज मांग को पूरी मुखरता के साथ सरकार के समक्ष रखने जा रहे हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस दौरे पर धरमजयगढ़ वासियों को नया जिला मिलने की सौगात मिलती है या फिर निराशा का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है।