गौरी शंकर गुप्ता/अंबिकापुर (सरगुजा)। Ambikapur Politics: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में उच्च न्यायालय द्वारा एक मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने के बाद उपजे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। न्यायालय के फैसले के बाद कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर कथित तौर पर धमकाने, अपशब्दों का प्रयोग करने और “फैसला ऑन द स्पॉट” जैसी बातें प्रसारित किए जाने का मामला सामने आया है। इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए जन अधिकार परिषद, छत्तीसगढ़ के संयोजक त्रिभुवन सिंह ने एक तीखा और विस्तृत बयान जारी किया है। परिषद ने इसे न्यायपालिका, कानून और प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाला कृत्य करार दिया है।
जन अधिकार परिषद ने मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ गहन उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दीपावली के पावन पर्व पर जिले का माहौल बिगाड़ने के पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण षड्यंत्र तो नहीं है।
कानून को हाथ में लेना पूरी तरह अवैध
बयान में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भी व्यक्ति या पक्ष को किसी न्यायिक निर्णय से असहमति है, तो देश के संविधान और कानून में उसके समाधान के लिए वैधानिक प्रावधान मौजूद हैं। कानून को अपने हाथ में लेना और सोशल मीडिया के जरिए हिंसा या भय का माहौल पैदा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और आपराधिक षड्यंत्र है। परिषद ने अनर्गल बयानबाजी करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि आम जनता में डर पैदा करने और शांति व्यवस्था भंग करने के प्रयासों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई की सराहना और शांति की अपील
संयोजक त्रिभुवन सिंह ने इस दौरान सरगुजा के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही न्यायोचित कार्रवाई की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की मुस्तैदी से पीड़ित और शोषित पक्ष को राहत मिल रही है तथा जिले में कानून का राज कायम है। अंत में, जन अधिकार परिषद ने क्षेत्र के सभी नागरिकों से दीपावली के पावन पर्व पर आपसी भाईचारा, अमन-चैन और सौहार्द बनाए रखने की पुरजोर अपील की है।
