Wednesday, September 2, 2026
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Chhath Puja 2025 : छठ के तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Chhath Puja 2025 :  नई दिल्ली। छठ महापर्व के तीसरे दिन व्रती दिन भर निर्जला उपवास रखते हैं और शाम के समय नदी, तालाब या अन्य जल स्रोत के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस अवसर पर बांस के सूप में फल, ठेकुआ, गन्ना, नारियल और अन्य प्रसाद रखा जाता है। सूर्य देव को दूध और जल मिश्रित जल से अर्घ्य देने की परंपरा होती है।

इस दिन व्रती सूर्यास्त से पहले सूर्य की ओर मुख करके पीतल के पात्र या कलश से अर्घ्य देते हैं और ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हैं। अर्घ्य देने के दौरान परिवार की भलाई और कल्याण के लिए विशेष मनोकामनाएं की जाती हैं। इस अवसर पर दीपक जलाकर उसे जल में प्रवाहित करना भी शुभ माना जाता है।

Chhath Puja 2025हिंदू पंचांग के अनुसार, शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय शाम 5 बजकर 10 मिनट से शाम 5 बजकर 58 मिनट तक है। छठ व्रत संतान की प्राप्ति, उसके स्वास्थ्य और प्रगति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत पाचन तंत्र और त्वचा संबंधी रोगों में भी लाभकारी होता है और जिनकी जन्म कुंडली में सूर्य का प्रभाव कमजोर होता है, उनके लिए विशेष रूप से फलदायी होता है।

Chhath Puja 2025 :   छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है। पहला दिन नहाय-खाय से शुरू होता है, दूसरे दिन खरना का विधान होता है। तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त किया जाता है। व्रती इस चार दिवसीय पर्व के दौरान अपनी भक्ति और आस्था के साथ सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं।

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