Chhath Puja 2025 : आस्था का महापर्व छठ पूजा चल रहा है। आज (तीसरे दिन) शाम को डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और कल उगते सूर्य को ऊषा अर्घ्य दिया जाएगा, जिसके साथ ही इस महापर्व का समापन होगा। छठ पूजा का एक अभिन्न हिस्सा है सूर्य देव को जलस्रोत में खड़े होकर अर्घ्य देना। इसके पीछे न सिर्फ गहरी धार्मिक मान्यताएं हैं, बल्कि वैज्ञानिक और योगिक महत्व भी जुड़े हुए हैं।
Chhath Puja 2025 : जल में खड़े होकर अर्घ्य देने का कारण:
1. धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता:
- जीवन के स्रोतों का सम्मान: सूर्य देव को जीवन और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि जल को जीवन का आधार। जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से भक्त जीवन के इन दोनों महत्वपूर्ण स्रोतों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करते हैं।
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- भगवान विष्णु का निवास: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक के महीने में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का निवास जल में होता है। इसलिए इस समय जल में खड़े होकर पूजा करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
- अहंकार त्याग: नदियों को देवी का रूप माना जाता है। जल में खड़ा होना अहंकार के त्याग का प्रतीक भी है, क्योंकि जल सभी के लिए समान है।
- परंपरा: यह भी माना जाता है कि अर्घ्य देते समय जल के छींटे पैर में न पड़ें, इसलिए सूर्य देव को अर्घ्य कमर तक के पानी में खड़े होकर दिया जाता है।
2. वैज्ञानिक और योगिक लाभ:
- ऊर्जा संतुलन: जल में खड़े रहने से सूर्य की किरणें शरीर पर सीधी और परावर्तित (Reflected) दोनों तरह से पड़ती हैं, जिससे शरीर को सूर्य की ऊर्जा का अधिकतम लाभ मिलता है।
- स्वास्थ्य लाभ: जल में खड़े रहना शरीर के तापमान को संतुलित करता है और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
- एकाग्रता: इस कठिन साधना के दौरान मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
छठी मैया और सूर्य देव की पूजा का यह विधान, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और स्वास्थ्य लाभ के सिद्धांतों का एक अद्भुत मिश्रण है।











