Rajnandgaon Cow Slaughter Case: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में गौहत्या मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मांस की बिक्री और आरोपियों के नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी अब्दुल अलीम उर्फ कनवा नागपुर से कसाई बुलाता था। आरोप है कि रात के समय घुमंतू गोवंश को घर लाकर उनकी हत्या की जाती थी और गो-मांस करीब 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता था। मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस ने नागपुर निवासी एजाज अहमद उर्फ कसाई (39) को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा गौरीनगर की खैरून निशा (60) और नसीमा बेगम उर्फ रानी (57) को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाओं ने गो-मांस खरीदा था।इससे पहले 17 अक्टूबर को 10 आरोपियों को जेल भेजा गया था, जबकि एक नाबालिग को बालिका गृह भेजा गया। ताजा गिरफ्तारियों के बाद मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 14 हो गई है। इनमें चार महिलाएं शामिल हैं।
अक्टूबर में दो घटनाओं की आशंका
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर 10 और 11 अक्टूबर की दरम्यानी रात तथा 13 से 15 अक्टूबर के बीच दो घटनाओं को अंजाम दिया था। गौरीनगर में 12 अक्टूबर और शीतला तालाब में 14 अक्टूबर को गोवंश के कटे हुए सिर मिलने के बाद मामला सामने आया था।इन घटनाओं के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की भूमिका, घटनास्थल तथा मांस की बिक्री से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस अब कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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चिकन-मटन दुकानों तक पहुंचता था मांस
पुलिस का दावा है कि शहर के कुछ चिकन-मटन केंद्रों पर भी गो-मांस बेचा जा रहा था। जांच में नागपुर से मांस की आपूर्ति होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ खरीदार सीधे कसाइयों के संपर्क में थे।इसी मामले में आरोपी आरिफ कुरैशी की गौरीनगर मैदान के पास स्थित चिकन दुकान को रविवार को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। हालांकि, दुकान पर हुई कार्रवाई और आपराधिक मामले में आरोपों की स्थिति अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत देखी जाएगी।
पुलिस ने क्या कहा?
नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी के मुताबिक, मामले में तकनीकी साक्ष्यों की जांच जारी है। पुलिस मांस की आपूर्ति, खरीद-बिक्री और आरोपियों के आपसी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। उनका कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।फिलहाल पुलिस का ध्यान पूरे कथित नेटवर्क का पता लगाने और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने पर है। आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।