CG NEWS : धरमजयगढ़ में ‘भू-माफिया’ का दुस्साहस: पटवारी और रसूखदारों ने मिलीभगत से बेच खाया ‘बड़े झाड़ का जंगल’…

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CG NEWS : गौरी शंकर गुप्ता /घरघोड़ा। गौरी शंकर गुप्ताः जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान नहीं, बल्कि बदनुमा दाग लग चुका है। यहाँ आम आदमी अपनी जमीन के छोटे से सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों की चैखट पर एड़ियाँ रगड़कर दम तोड़ देता है, वहीं धनबल के दम पर भू-माफिया सरकारी ‘बड़े झाड़ के जंगल’ को भी अपनी जागीर बना लेते हैं। धरमजयगढ़ के ग्राम रायमेर में सरकारी जमीन की खुलेआम डकैती का ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।

सरकारी जमीन पर डकैती की ‘स्क्रिप्ट’: धरमजयगढ़ में सरकारी जमीन को हथियाने के लिए जो कारनामा किया गया, वह किसी संगठित अपराध से कम नहीं है। ग्राम रायमेर की बेशकीमती शासकीय भूमि (खसरा नं. 467/23, 467/25 और 467/36), जो 1930 से ‘बड़े झाड़ के जंगल’ मद में दर्ज थी, उसे अधिकारियों की नाक के नीचे निजी संपत्ति बना दिया गया।

CG NEWS : पहला फर्जीवाड़ा: माफिया ने जमीन को ग्रामीण उजिन राम के नाम पर चढ़ाया।दूसरा फर्जीवाड़ा: उजित राम के नाम से धरमजयगढ़ निवासी कैलाश कुमार जेठवानी को फर्जी ‘पावर आॅफ अटाॅर्नी’ दिलवाई गई, जबकि असली उजित राम इस कैलाश को पहचानता तक नहीं।
तीसरा फर्जीवाड़ाः कैलाश ने तत्काल यह जमीन पत्थलगांव निवासी मधुसूदन अग्रवाल को बेच दी।

भक्षक बना रक्षक: पटवारी की भूमिका इस पूरे खेल में हल्का पटवारी राकेश साय की भूमिका सबसे संदिग्ध और शर्मनाक रही। जिस पटवारी पर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा था, उसी ने फर्जीवाड़े की नींव रखी। उसने आंख मूंदकर विक्रय पत्र के साथ फर्जी नक्शा, खसरा और चतुर्सीमा रिपोर्ट लगा दी। तत्कालीन तहसीलदार लीलाधर चंद्रा के कार्यकाल में नामांतरण का यह खेल इतनी आसानी से हो गया, मानो यह सरकारी जमीन नहीं, कोई लावारिस वस्तु हो।
सिस्टम का काला सचः जांच पूरी, कार्रवाई अधूरी: इस मामले की सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि चोरी पकड़ी जा चुकी है, लेकिन चोर खुले घूम रहे हैं।

1. प्रशासनिक जांच में स्पष्ट हो चुका है कि जमीन सरकारी थी।
2. जांच में पटवारी राकेश साय, कैलाश जेठवानी और मधुसूदन अग्रवाल के खिलाफ थ्प्त् दर्ज करने का आदेश दिया गया।
3. पटवारी सस्पेंड हुआ, लेकिन उसके बाद फाइल गायब हो गई या दबा दी गई।

CG NEWS : बड़ा सवाल: किसके इशारे पर दबी है फाइल? – आखिर वह कौन सा ‘अदृश्य हाथ’ है जो इन भू-माफियाओं को बचा रहा है? जांच रिपोर्ट में अपराध सिद्ध होने के बावजूद पुलिस थाने तक फाइल क्यों नहीं पहुँच रही? क्या राजस्व विभाग के उच्च अधिकारी किसी दबाव में हैं या इस ‘लूट’ में उनकी भी मौन सहमति है?
रिकाॅर्ड में आज भी ‘फर्जीवाड़ा’ जिंदा हैरत की बात है कि घोटाला उजागर होने के बाद भी सरकारी रिकाॅर्ड सुधारे नहीं गए हैं। जंगल की जमीन आज भी कागजों में ‘कृषि भूमि’ बनी हुई है और उस पर धान की फसल (गिरदावरी) दिखाई जा रही है।

CG NEWS : सीधी बात: रायगढ़ प्रशासन को जवाब देना होगा कि कानून सिर्फ गरीबों के लिए है या रसूखदारों पर भी लागू होता है? यदि जल्द ही दोषियों पर थ्प्त् दर्ज नहीं हुई और जमीन वापस जंगल मद में दर्ज नहीं की गई, तो यह मान लिया जाएगा कि इस ‘लूट’ में पूरा सिस्टम शामिल है।

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