Wednesday, August 26, 2026
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CG News : तमनार : सूचना आयोग की सख़्त कार्रवाई, पेलमा पंचायत सचिव को बुलाया, सूचना न देने पर तय होगी जवाबदेही

गौरी शंकर गुप्ता /रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग (CIC) ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दाखिल अपील पर एक बार फिर सख़्त रुख अपनाया है। रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बजरमुड़ा (पो. सरेलीटोला) के सचिव द्वारा समय पर सूचना न दिए जाने के मामले में आयोग ने कड़ा कदम उठाया है। आयोग ने ग्राम पंचायत पेलमा के सचिव (जो कि जनसूचना अधिकारी हैं) और जनपद पंचायत तमनार के संबंधित अधिकारियों को सीधे नोटिस जारी कर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला अपीलकर्ता श्री कार्तिक राम पोर्ते, निवासी ग्राम बजरमुड़ा, का है, जिन्होंने पंचायत स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मांगी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मांगने के बाद महीनों बीत गए, लेकिन पंचायत सचिव और जनपद अधिकारियों ने उन्हें मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई। प्रथम अपील में भी जानकारी न मिलने पर पोर्ते ने हार नहीं मानी और राज्य सूचना आयोग, नया रायपुर में द्वितीय अपील दायर की, जिस पर सुनवाई के लिए आयोग ने संबंधित अधिकारियों को तलब किया है।

राज्य सूचना आयोग ने जारी पत्र (क्रमांक 145017/ए.आई./3924/2024/रायगढ़) में वर्तमान जनसूचना अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना के संबंध में सभी अभिलेखों की सत्यापित प्रतिलिपि आयोग को प्रस्तुत करें। आयोग ने चेतावनी दी है कि “यदि समय सीमा में सूचना नहीं दी गई तो सूचना अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है।” आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि सुनवाई में अधिकारियों की अनुपस्थिति को “जानबूझकर की गई लापरवाही” माना जाएगा, जिसके लिए विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने इस प्रकरण की द्वितीय अपील की सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर 2025 को निर्धारित की है। यह सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला सूचना विज्ञान केंद्र, रायगढ़ में आयोजित होगी। अपीलकर्ता और संबंधित अधिकारियों को इस निर्धारित तिथि पर उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं। इस प्रकरण से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि ग्रामीण स्तर पर सूचना के अधिकार कानून (RTI) का मखौल उड़ाया जा रहा है और निचले स्तर के अधिकारी लोकतांत्रिक पारदर्शिता के प्रति कितने उदासीन और लापरवाह हैं।

अपीलकर्ता श्री कार्तिक राम पोर्ते ने आयोग के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “ग्राम पंचायत में पारदर्शिता की मांग करना जैसे अपराध हो गया है। आयोग का यह कदम स्वागत योग्य है, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी जनसूचना कानून को हल्के में न ले।” छत्तीसगढ़ में राज्य सूचना आयोग की यह सक्रियता नागरिक अधिकारों की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है। यदि आयोग इस प्रकरण में कठोर निर्णय लेता है, तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्र को एक कड़ा संदेश देगा कि सूचना छिपाने की लापरवाही अब महंगी पड़ेगी।

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