CG NEWS : सरगुजा : सरगुजा राज परिवार को लगभग 26 साल पुराने मानहानि विवाद में बड़ी जीत मिली है, जबकि भाजपा नेता और उस समय के मध्य प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार साय को भी राहत प्रदान की गई है। अदालत ने 1998 में प्रकाशित एक विवादित रिपोर्ट को आधार मानते हुए अखबार के मालिकों, संपादक, प्रकाशक और मुद्रक को दोषी ठहराया है तथा प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये का जुर्माना लगाया है।
CG NEWS : न्यायालय ने माना कि प्रीति श्रीवास्तव हत्याकांड के बाद नंदकुमार साय द्वारा दिए गए भाषण को अखबार ने तोड़मरोड़कर प्रस्तुत किया। रिपोर्ट में ऐसी बातें जोड़ दी गईं जिनका उल्लेख साय ने किया ही नहीं था। इससे सरगुजा राजपरिवार की प्रतिष्ठा को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचा और समाचार मानहानि की श्रेणी में आता है।
CG NEWS : मालूम हो कि दिसंबर 1998 में अंबिकापुर के गर्ल्स कॉलेज परिसर में छात्रा प्रीति श्रीवास्तव की जीप चढ़ाकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद हुई एक सभा में नंदकुमार साय ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। लेकिन अगले दिन प्रकाशित खबर में दावा किया गया कि हत्या के आरोपी राजपरिवार से जुड़े हैं और पैलेस दबाव डाल रहा है। साथ ही यह भी लिखा गया कि जांच होने पर कई हत्याकांड उजागर होंगे और दिग्विजय सिंह सरकार में सामंती प्रवृत्तियां बढ़ी हैं।
इन कथनों से आहत होकर सरगुजा राजपरिवार ने मानहानि का दावा किया। सुनवाई में साय ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी राजपरिवार या टीएस सिंहदेव के खिलाफ बयान नहीं दिया और यदि ऐसा होता तो अन्य मीडिया में भी खबर आती।
CG NEWS : करीब तीन दशक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला सरगुजा राजपरिवार और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के लिए महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है। यह निर्णय उस दौर की राजनीतिक बयानबाजी और पत्रकारिता की जवाबदेही पर एक अहम टिप्पणी भी छोड़ता है।











