रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें विचाराधीन बंदी राशिद अली उर्फ राजा बैझाड़ जेल परिसर में खुलेआम कसरत करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि वीडियो 5 अक्टूबर 2025 को जेल के अंदर ही मोबाइल फोन से बनाया गया था। इस गंभीर लापरवाही के चलते दो प्रहरियों को बर्खास्त और एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो उसी समय शूट किया गया जब प्रहरी राधेलाल खुंटे और बिपिन खलखो ड्यूटी पर तैनात थे। दोनों ने न केवल वीडियो बनने से रोकने में विफलता दिखाई, बल्कि इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं दी। यही नहीं, विचाराधीन बंदी राशिद अली ने उसी दिन अपने साथियों राहुल दुबे, विश्वनाथ राव और रोहित यादव के साथ जेल के अंदर मोबाइल से सेल्फी भी ली थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वीडियो बनाने वाला मोबाइल दूसरे बंदी शशांक चोपड़ा के पास था, जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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जेल अधीक्षक ने दोनों प्रहरियों की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की, जबकि महानिदेशक (जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं) ने अष्टकोण अधिकारी संदीप कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रहरी राधेलाल खुंटे का अनुशासनहीनता का इतिहास रहा है। वर्ष 2008, 2012, 2014 और 2023 में उन्हें विभिन्न लापरवाहियों के चलते चेतावनी और दंड दिए जा चुके हैं। वहीं बिपिन खलखो पर भी 2019 से लेकर 2022 तक कई अनुशासनात्मक कार्यवाहियां की गई थीं।
सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन आखिर पहुंचा कैसे। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि जेल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बंदियों को मोबाइल और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थीं। जेल प्रशासन ने अब इस दिशा में अलग से जांच टीम गठित की है, जो यह पता लगाएगी कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई और कौन-कौन इसमें शामिल था।
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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राशिद अली उर्फ राजा बैझाड़ को एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत 11 जुलाई 2025 को टिकरापारा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह पिछले तीन महीनों से रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में बंद है। पुलिस को संदेह है कि वह जेल के भीतर से ही नशे के कारोबार और वसूली नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वायरल वीडियो ने न केवल जेल की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सुधारात्मक प्रणाली की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।











