Friday, August 21, 2026
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CG News : हाईकोर्ट ने निरस्त किया बीईओ का निलंबन आदेश, कहा- कलेक्टर के पास नहीं था अधिकार

CG Liquor Scam Case
CG Liquor Scam Case

CG News :  बिलासपुर | बिलासपुर हाईकोर्ट ने बस्तर संभाग के जगदलपुर जिले में पदस्थ खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) मानसिंह भारद्वाज के निलंबन आदेश को अवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि कलेक्टर को इस स्तर के अधिकारी को निलंबित करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिया गया फैसला करार दिया और विधि विरुद्ध बताया।

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गलत जानकारी के आरोप में हुआ था निलंबन

मानसिंह भारद्वाज, जो मूलतः प्राचार्य हैं, वर्तमान में जगदलपुर विकासखंड में बीईओ पद पर पदस्थ थे। उन पर युक्तियुक्तकरण (rationalization) संबंधी जानकारी उच्च कार्यालय को गलत रूप में भेजने का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर उन्हें 6 जून 2025 को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन का आदेश प्रभारी कलेक्टर द्वारा जारी किया गया, जबकि मूल आदेश संभागायुक्त बस्तर द्वारा जिला प्रशासन को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया था।

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छुट्टी के दौरान निलंबन

याचिकाकर्ता भारद्वाज ने हाईकोर्ट को बताया कि वे 2 जून से 6 जून तक अपने भतीजे की शादी में सम्मिलित होने के लिए मध्यप्रदेश के सिवनी गए थे। उन्होंने पूर्व में अवकाश की अनुमति ली थी। परंतु 4 जून को उनकी छुट्टी अचानक निरस्त कर दी गई और 5 जून को उन्हें तत्काल कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश मिला। वे जब तक लौटते, 6 जून को निलंबन आदेश जारी हो चुका था।

न सुनवाई, न नोटिस

हाईकोर्ट को बताया गया कि निलंबन से पूर्व न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। इस आधार पर पहले सिंगल बेंच में याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।

कलेक्टर नहीं हैं नियुक्ति अथवा निलंबन प्राधिकारी

खंडपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि कलेक्टर बीईओ के नियुक्ति अथवा निलंबन प्राधिकारी नहीं हैं। बीईओ जैसे द्वितीय श्रेणी (Class-II) के अधिकारियों को निलंबित करने का अधिकार केवल संभागायुक्त या स्कूल शिक्षा सचिव को है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निलंबन आदेश पर स्वयं कलेक्टर के हस्ताक्षर नहीं थे, बल्कि किसी अधीनस्थ अधिकारी ने हस्ताक्षर किए थे, जो सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

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कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने अपने निर्णय में टिप्पणी की—

“जब निलंबन जैसी कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है, तो यह आवश्यक है कि प्राधिकारी विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करे। अन्यथा ऐसा आदेश असंवैधानिक और शून्य (null and void) माना जाएगा।”

कार्रवाई की खुली छूट

हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि संभागीय आयुक्त उचित समझें तो वे दो सप्ताह के भीतर नियमानुसार पुनः उचित प्रक्रिया अपनाते हुए कार्रवाई कर सकते हैं।

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VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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