Saturday, August 15, 2026
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CG Latest News : अबूझमाड़ के ईरकभट्टी में शिक्षा की वापसी : युक्तियुक्तकरण से बंद स्कूल फिर गुलजार

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CG Latest News : अबूझमाड़ के ईरकभट्टी में शिक्षा की वापसी : युक्तियुक्तकरण से बंद स्कूल फिर गुलजार
CG Latest News : अबूझमाड़ के ईरकभट्टी में शिक्षा की वापसी : युक्तियुक्तकरण से बंद स्कूल फिर गुलजार

छत्तीसगढ़ | CG Latest News : कभी वीरान पड़ा था ये स्कूल…. दरवाजों पर ताले लटकते थे, कमरे धूल और सन्नाटे से भरे रहते थे. लेकिन आज वही ईरकभट्टी का प्राथमिक शाला बच्चों की चहचहाहट और पाठों की गूंज से फिर से जीवंत हो उठा है. अबुझमाड़ के इस सुदूर गांव में फिर से शिक्षा की लौ जल उठी है, जिसका श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा संचालित ‘नियद नेल्ला नार’ योजना और युक्तियुक्तकरण की पहल को जाता है.

CG Latest News : बीते कुछ वर्षों में माओवादी गतिविधियों के चलते गांवों की रंगत फीकी पड़ गई थी. बच्चों के हाथों से किताबें छूट गई थीं, स्कूलों के आँगन सुनसान हो गए थे और मांदर की थाप भी खामोश हो गई थी. नारायणपुर जिले के ईरकभट्टी भी ऐसा ही एक गांव था, जहां लोग हर हाल में जीवन को संवारने की कोशिश करते थे, लेकिन शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत तक से वंचित थे. यहां के निवासी रामसाय काकड़ाम कहते है कि पहले लगता था कि हमारे बच्चे शायद कभी स्कूल का नाम भी नहीं जान पाएंगे, लेकिन अब जब शिक्षकों की नियुक्ति हो गई है और स्कूल फिर से खुल गया है, तो लगता है मानो गाँव में फिर से जान लौट आई हो.

‘नियद नेल्ला नार’ यानी ‘आपका अच्छा गांव’ योजना ने ईरकभट्टी जैसे दूरदराज और संघर्षरत गांवों में एक नई उम्मीद जगाई है. सुरक्षा कैंपों के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुँचाया जा रहा है. इसी क्रम में ईरकभट्टी में सड़क बनी, बिजली पहुंची और वर्षों से बंद पड़ा प्राथमिक स्कूल फिर से खुल गया. शासन के युक्तियुक्तकरण प्रयास से प्राथमिक शाला ईरकभट्टी में अब दो शिक्षक नियमित रूप से पदस्थ हैं. अशोक भगत और लीला नेताम नामक शिक्षक यहां के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वे न केवल पठन-पाठन का कार्य कर रहे हैं, बल्कि अभिभावकों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें.

शिक्षिका लीला नेताम बताती हैं कि पहले तो यहां डर लगता था, लेकिन बच्चों की मुस्कुराहट सब डर भुला देती है. ये बच्चे बहुत होशियार हैं, बस उन्हें अवसर की जरूरत थी. अब हम हर दिन उन्हें नया सिखाने का प्रयास करते हैं. अब स्कूल में दर्जन भर से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. छोटे-छोटे हाथों में किताबें हैं, और उन आंखों में भविष्य के सपने. पहले जो गांव स्कूल जाने के नाम से डरते थे, अब वहां लोग अपने बच्चों को कंधे पर बिठाकर स्कूल छोड़ने आते हैं.

गांव के बुजुर्ग मंगतु बाई की आंखों में आंसू हैं, लेकिन खुशी के. वे कहती हैं कि अब हमारी पोती भी पढ़-लिखकर अफसर बन सकती है. हमने कभी सोचा भी नहीं था कि ये दिन भी देखेंगे. ईरकभट्टी की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन हजारों गाँवों की है, जो कभी उपेक्षा और असुरक्षा के अंधेरे में डूबे हुए थे. लेकिन अब ‘नियद नेल्ला नार’ और युक्तियुक्तकरण जैसी योजनाएं उनके जीवन में उजाले की किरण लेकर आई हैं. शिक्षा की लौ फिर से जल चुकी है और यह लौ अब बुझने वाली नहीं.

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