नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। सोमवार, 26 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड के दामों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद कीमतें चिंताजनक स्तर पर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 115 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है।
तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण बनी यह अनिश्चितता भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए काफी चिंताजनक है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आगामी नवंबर महीने में देश के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं?
आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव
सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 1.34% की गिरावट देखी गई, जिसके बाद यह 115.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) क्रूड का भाव लगभग 1.55% गिरकर 101.67 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मामूली गिरावट के बावजूद दोनों मुख्य बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर हैं। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गया था। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और सऊदी अरब जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देशों में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है।
आज प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की दरें
फिलहाल देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने खुदरा दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख महानगरों में आज के भाव इस प्रकार हैं:
-
दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर | डीजल ₹95.20 प्रति लीटर
-
मुंबई: पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर | डीजल ₹97.83 प्रति लीटर
-
कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51 प्रति लीटर | डीजल ₹99.82 प्रति लीटर
-
चेन्नई: पेट्रोल ₹107.76 प्रति लीटर | डीजल ₹99.55 प्रति लीटर
-
गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.97 प्रति लीटर | डीजल ₹95.64 प्रति लीटर
-
नोएडा: पेट्रोल ₹101.96 प्रति लीटर | डीजल ₹95.44 प्रति लीटर
क्या नवंबर में बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहना भारत की आयात लागत (Import Bill) को सीधा बढ़ा देता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगता है।
हालांकि, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरें बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में दरें तुरंत बढ़ा दी जाएं। खुदरा कीमतें तय करने में तेल विपणन कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन, केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स (Excise Duty & VAT) और सरकारी फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार या तेल कंपनियों की ओर से नवंबर महीने में कीमतें बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड इसी तरह $115 के आसपास बना रहता है, तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आगे चलकर खुदरा दरों में संशोधन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।