Border war : थाईलैंड ने कंबोडिया पर F-16 से किया हवाई हमला, बढ़ा सीमा युद्ध, 16 की मौत, भारत ने जारी की चेतावनी

VIKASH KHALKHO
nishanebaaz.com

Border war : नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देशों—थाईलैंड और कंबोडिया—के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया है। ताजा झड़पों में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अपने घरों से पलायन को मजबूर हो गए हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी के बाद अब हवाई हमले शुरू हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।

F-16 और ग्रिपेन जेट से थाईलैंड का जवाबी हमला
थाईलैंड की रॉयल एयर फोर्स ने शुक्रवार देर रात दो F-16 फाइटर जेट और दो ग्रिपेन लड़ाकू विमानों को सीमा पार भेजकर कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला किया। थाई सेना के अनुसार, यह जवाबी कार्रवाई कंबोडिया द्वारा की गई तोपखाने और रॉकेट हमलों के बाद की गई है। थाई विमानों ने फू माकुआ और प्रासात ता मुएन थोम क्षेत्रों में स्थित कंबोडियाई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया और सुरक्षित लौट आए।

कंबोडिया ने संयुक्त राष्ट्र से मांगी मदद
इस हमले के बाद कंबोडिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल युद्धविराम की अपील की है। न्यूयॉर्क में कंबोडिया के स्थायी प्रतिनिधि चेया केओ ने कहा, “हम शांति चाहते हैं। यह संघर्ष केवल बातचीत से सुलझ सकता है, न कि बमों से।” हालांकि, थाईलैंड की ओर से अभी तक इस अपील पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

8 जिलों में थाईलैंड ने लागू किया मार्शल लॉ
थाई सरकार ने सीमा से सटे 8 जिलों में मार्शल लॉ लागू कर दिया है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचयाचाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “स्थिति युद्ध की ओर बढ़ रही है।” उन्होंने यह भी पुष्टि की कि संघर्ष अब केवल गोलीबारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारी हथियारों और रॉकेटों का उपयोग हो रहा है। दोनों सेनाओं के बीच लड़ाई अब तक 12 इलाकों में फैल चुकी है।

भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी
भारत ने कंबोडिया और थाईलैंड में रह रहे अपने नागरिकों को सचेत किया है। भारतीय दूतावास ने एक सार्वजनिक सलाह में कहा है कि “भारतीय नागरिक सीमा क्षेत्रों की यात्रा से बचें।” कंबोडिया में रहने वाले भारतीयों से +855 92881676 पर संपर्क करने और emergency.phnompenh@mea.gov.in पर मेल करने की अपील की गई है। इसके अलावा थाईलैंड के सात प्रांतों को लेकर भी पूर्व चेतावनी जारी की गई है।

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पलायन और मानवीय संकट
यूएनएचसीआर (UNHCR) के मुताबिक, अब तक एक लाख से अधिक लोग थाई-कंबोडिया सीमा से पलायन कर चुके हैं। स्कूल, अस्पताल और धार्मिक स्थल अस्थायी शरणगृह में तब्दील किए गए हैं। दोनों देशों में राहत अभियान शुरू किए गए हैं, लेकिन भारी बमबारी के चलते उन्हें कई बार रोका जा रहा है।

विवाद की जड़: प्राचीन मंदिर क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संघर्ष एक बार फिर “प्रासात ता मुएन थोम” मंदिर क्षेत्र को लेकर उभरा है, जो दोनों देशों के बीच भूमि विवाद का कारण रहा है। यह इलाका ऐतिहासिक और सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, और इससे पहले भी 2011 और 2014 में हिंसा का केंद्र बन चुका है।

नज़रिए में: क्या यह पूर्ण युद्ध की आहट है?
थाईलैंड और कंबोडिया दोनों ही ASEAN सदस्य देश हैं। दोनों पर दबाव है कि वे बातचीत और कूटनीति के जरिए इस संकट का समाधान निकालें। परंतु यदि हवाई हमले और तोपखाने की जवाबी कार्रवाई नहीं रुकी, तो यह झड़प पूर्ण युद्ध का रूप ले सकती है, जिसका असर पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया पर पड़ सकता है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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