Sunday, August 16, 2026
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Bilaspur High Court: कर्मचारी की बैंक राशि का मालिक नामिनी नहीं… हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ससुर बनेंगे 15 लाख के वैध वारिस

CG NEWS
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Bilaspur High Court: कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में नामिनी को लेकर एक अहम फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नामिनी केवल खाते में जमा राशि का अभिरक्षक होता है, मालिक नहीं। इसलिए नामांकन के आधार पर उसे संपत्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। यह अधिकार केवल कानूनी वारिसों को प्राप्त होता है।

Bilaspur High Court: यह मामला स्वास्थ्य कार्यकर्ता रंजनादेवी प्रधान की मृत्यु के बाद उठे विवाद से संबंधित है। उनके बैंक ऑफ इंडिया, मुंगेली शाखा के खाते में लगभग 15 लाख रुपये जमा थे। मृत्यु के बाद इस राशि पर मृतका के दामाद राहुल ध्रुव और ससुर लल्लाराम दोनों ने दावा पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने नामांकित होने के आधार पर रकम दामाद को देने का आदेश दिया था। जिसके विरोध में मृतका के ससुर ने अपील दायर की।

Bilaspur High Court: जिला अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार कानून का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश पलट दिया और कहा कि मृतका के पति-पक्ष के वारिसों को प्रथम अधिकार प्राप्त होता है। इस आधार पर राशि का अधिकार ससुर लल्लाराम को दिया गया।

Bilaspur High Court: इसके बाद दामाद ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका लगाई। जस्टिस ए.के. प्रसाद की बेंच में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया गया और कहा गया कि नामिनी का अधिकार केवल संरक्षण तक सीमित है। नामांकन से वारिसों के वैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होते।

Bilaspur High Court: हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए दामाद की याचिका को खारिज कर दिया और मृतका के ससुर को मृत कर्मचारी की बैंक राशि का वैधानिक उत्तराधिकारी माना है।

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