Bhagirathpura Health Survey : इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में डायरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब ‘डोर-टू-डोर’ स्क्रीनिंग और मैपिंग की रणनीति अपनाई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CHMO) डॉ. माधव हसानी ने बताया कि पूरे क्षेत्र की सटीक स्थिति जानने के लिए 5,000 घरों के सर्वे का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 200 विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो एक-एक मरीज की लोकेशन और बीमारी की गंभीरता का डेटा एकत्र कर रही हैं।
पल्स पोलियो की तर्ज पर होगी गूगल मैपिंग सीएचएमओ डॉ. हसानी के अनुसार, सर्वे टीम में एक चिकित्सक, एक नर्सिंग ऑफिसर और एक आशा कार्यकर्ता को शामिल किया गया है। प्रत्येक टीम को 25 घरों की जिम्मेदारी दी गई है।
खास बात यह है कि पूरे डेटा को गूगल मैपिंग के जरिए संकलित किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी हॉटस्पॉट की तुरंत पहचान की जा सके। यह मॉडल ठीक वैसा ही है जैसा पल्स पोलियो अभियान के दौरान अपनाया जाता है। मौके पर ही दवाइयों का वितरण और उनके सेवन की जानकारी भी दी जा रही है।
अस्पतालों में स्थिति और विशेषज्ञ निगरानी वर्तमान स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। संजीवनी क्लीनिकों में मरीजों की आवक अब सामान्य दिनों जैसी हो गई है। कल क्षेत्र से 18 नए मरीज भर्ती हुए हैं, वहीं वर्तमान में 16 मरीज आईसीयू में उपचाराधीन हैं। इन मरीजों के बेहतर इलाज के लिए आसपास के मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ प्रोफेसरों को बुलाया गया है, जो लगातार विशेषज्ञों की राय प्रदान कर रहे हैं। भोपाल से आई विशेष टीम भी क्षेत्र के पानी और संक्रमण के कारणों की गहन जांच कर रही है।
मौत के आंकड़ों पर सफाई मृत्यु के आंकड़ों को लेकर सीएचएमओ ने स्पष्ट किया कि अब तक डायरिया से 6 मौतें सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच मेडिकल कॉलेज की टीम कर रही है। ओमप्रकाश वर्मा की मृत्यु के मामले में उन्होंने बताया कि वे डायरिया प्रकोप से पहले ही किडनी और बीपी की बीमारी के चलते भर्ती थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह प्रकोप एक ही क्षेत्र तक सीमित है, इसलिए फिलहाल इसे महामारी घोषित नहीं किया गया है। संभागायुक्त द्वारा गठित समिति मौतों के कारणों की बारीकी से जांच कर रही है।











