Betul News: बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के पश्चिम वन मंडल की गवासेन रेंज इन दिनों वन माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि डीएफओ के चहेते डिप्टी रेंजर बाथम के संरक्षण में अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पिछले महज 4 महीनों में सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि पर और अतिक्रमण कर लिया गया है। जबकि 4 माह पूर्व जंगल मे सैकड़ों सागौन के हरे भरे पेड़ हुआ करते थे महज चार महीनों में इस तरह जंगलों के सफाया और अवैध कटाई कई सवाल खड़े कर रही है बता दे कि जानकारी मिली है कि केमिकल से सुखाए जा रहे सागौन के बड़े बड़े पुराने मदर ट्री इसके पहले भी हो चुका है सागौन के पेड़ों का सफाया।
Betul News: अतिक्रमण के लिए बेशकीमती सागौन के पेड़ों को कुल्हाड़ी से नहीं, बल्कि जड़ों में केमिकल डालकर सुखाया जा रहा है। पेड़ सूखने के बाद उसे जंगल से गायब कर जमीन पर कब्जा कर लिया जाता है।
Betul News: सूत्र बताते हैं कि यह कोई नया तरीका नहीं है। इसके पूर्व भी इसी फॉर्मूले से सैकड़ों सागौन के पेड़ों का सफाया किया जा चुका है। हैरानी की बात यह है कि आज तक उन कटे या सुखाए गए पेड़ों का न तो कोई पीओआर (प्राथमिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज हुआ, न ही वन विभाग के रिकॉर्ड में कोई एंट्री है।
Betul News: जिम्मेदार अधिकारी बने अंजान
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण और हरे-भरे जंगल के उजड़ने पर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। न रेंज स्तर पर कार्रवाई हो रही है, न मंडल स्तर पर। इससे साफ जाहिर होता है कि अतिक्रमणकारियों को ऊपर तक का संरक्षण प्राप्त है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी रफ्तार से जंगलों का सफाया होता रहा तो आने वाले समय में ग्लोबल वार्मिंग का खतरा 200 गुना बढ़ जाएगा। इसका खामियाजा सिर्फ बैतूल को नहीं, पूरी मानवता को भुगतना पड़ेगा।
बुधनी मॉडल से हो कार्रवाई तो सामने आए लाखों हेक्टेयर
उल्लेखनीय है कि हाल ही में बुधनी वन मंडल में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई थी। वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि अगर बुधनी की तर्ज पर बैतूल पश्चिम वन मंडल की गवासेन रेंज से भी ईमानदारी से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाए, तो सैकड़ों हेक्टेयर जंगल की जमीन अतिक्रमण से मुक्त हो सकती है।
गलत रिपोर्ट और एपीसीसीएफ के दौरे पर सवाल
सबसे गंभीर आरोप उच्च स्तर पर भेजी गई रिपोर्ट को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि गवासेन रेंज से अतिक्रमण को लेकर जो रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है, वह भी गलत भेजी गई है और ये जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। इसकी भी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होना चाहिए।
Betul News: वहीं, कुछ दिन पूर्व एपीसीसीएफ का भी इस क्षेत्र का दौरा हुआ था। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर फैला अतिक्रमण उन्हें भी नजर नहीं आया? या फिर उन्हें भी वही दिखाया गया जो अधिकारी दिखाना चाहते थे? यह एक गंभीर सवाल है जो वन विभाग की कार्यप्रणाली पर ही प्रश्नचिन्ह लगाता है।
