Sunday, August 16, 2026
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Basant Panchami 2026 Date : पीले वस्त्रों में करें माँ शारदे का वंदन, जानें पूजन विधि और ग्रहों को मजबूत करने के अचूक उपाय

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Basant Panchami 2026 Date : बसंत पंचमी का त्योहार विद्या और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती की आराधना का सबसे पावन दिन है। साल 2026 में इस पर्व की तारीख को लेकर बना संशय अब दूर हो गया है। उदया तिथि के मान के अनुसार, इस बार 23 जनवरी को ही ज्ञान का यह उत्सव मनाया जाएगा।

तारीख और शुभ मुहूर्त (Date & Timing)

हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि का विस्तार इस प्रकार है:

  • तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार (रात 02:28 बजे से)

  • तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, शनिवार (रात 01:46 बजे तक)

  • मुख्य पर्व तिथि: 23 जनवरी 2026 (उदया तिथि के आधार पर)

पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त:

सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक

महत्व: क्यों है यह दिन खास?

बसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। इस दिन बिना कोई पंचांग देखे सगाई, विवाह, मुंडन, गृह निर्माण या व्यापार की शुरुआत की जा सकती है। यह दिन विशेष रूप से छात्रों, संगीतकारों और कलाकारों के लिए माँ सरस्वती का आशीर्वाद पाने का महापर्व है।

पूजन विधि और नियम (Puja Vidhi)

  • वस्त्र चयन: इस दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें। लाल या काले रंग के कपड़ों से परहेज करें।

  • दिशा: पूजा करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

  • अर्पण: देवी को श्वेत चंदन, पीले और सफेद फूल चढ़ाएं।

  • भोग: केसरिया खीर, दही या मिश्री का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है।

  • मंत्र: पूजा के दौरान “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का निरंतर जाप करें।

ग्रह दोष निवारण के उपाय (Astrological Remedies)

बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा से आप अपनी कुंडली के ग्रहों को भी शुभ बना सकते हैं:

  1. बुध (Budh) की मजबूती के लिए: यदि बुद्धि और एकाग्रता की कमी है, तो देवी को हरे फल अर्पित करें।

  2. गुरु (Guru) की मजबूती के लिए: शिक्षा में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए पीले वस्त्र पहनें और देवी को पीले फूल चढ़ाएं।

  3. शुक्र (Shukra) की मजबूती के लिए: करियर में असमंजस और मानसिक चंचलता को दूर करने के लिए माँ सरस्वती को सफेद फूल चढ़ाएं।

विशेष लाभ: वाणी और एकाग्रता

  • अध्ययन कक्ष (Study Room) में माँ सरस्वती का चित्र या उनका बीज मंत्र “ऐं” लिखकर लगाना विशेष फलदायी होता है।

  • जिन बच्चों को वाणी या सुनने की समस्या है, वे इस दिन पीतल की धातु पर “ऐं” लिखकर उसे धारण कर सकते हैं।

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