Balrampur Panchayat Fraud Case : वाड्रफनगर/बलरामपुर: जिले के जनपद पंचायत वाड्रफनगर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत महुली में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक अनोखा मामला प्रकाश में आया है। यहाँ की सरपंच श्यामकली पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए ग्राम सचिव के फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी मुहर (सील) के जरिए जिला पंचायत सीईओ को शिकायत भेजी और आवास मित्र को पद से हटवा दिया।

निजी दुश्मनी में रची गई साजिश जानकारी के अनुसार, यह मामला मार्च 2025 का है। पीड़ित आवास मित्र उमाशंकर जायसवाल का आरोप है कि सरपंच श्यामकली ने उनसे अपनी पुरानी निजी दुश्मनी निकालने के लिए यह पूरी साजिश रची। सरपंच ने एक आवेदन तैयार किया जिसमें सचिव की सहमति दिखाई गई थी, जबकि हकीकत में सचिव को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर जिला प्रशासन ने उमाशंकर जायसवाल को पदमुक्त कर दिया।
सचिव के लिखित स्पष्टीकरण से खुला राज इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब ग्राम सचिव ने लिखित में यह स्पष्टीकरण दिया कि उन्होंने आवास मित्र को हटाने के संबंध में किसी भी आवेदन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही वह सील उनकी है। सचिव के इस पत्र ने सरपंच के दावों की पोल खोल दी है। इसके बाद पीड़ित उमाशंकर ने जिला कार्यपालन अधिकारी के पास न्याय की गुहार लगाई, जहाँ से मामला जांच के लिए जनपद पंचायत वाड्रफनगर भेजा गया।
जनपद स्तर पर ‘लीपापोती’ के आरोप हैरानी की बात यह है कि घटना को लगभग एक साल बीतने को है, लेकिन जनपद स्तर पर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। पीड़ित का आरोप है कि दोषी सरपंच पर कार्रवाई करने के बजाय, प्रशासन उसे ही प्रताड़ित कर रहा है। मामले में हो रही देरी से प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल जांच की फाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूम रही है और पीड़ित अपनी बहाली के इंतजार में भटक रहा है।











