Balod News : खैरा स्कूल की बदहाली: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा

Sanjay Sahu
Balod News

Balod News : बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के देवरी संकुल केंद्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत मार्री बंगला के आश्रित गांव खैरा का प्राथमिक विद्यालय शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा का स्पष्ट उदाहरण है। यह स्कूल न केवल आधारभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है, बल्कि ग्रामीण भारत में शिक्षा की दयनीय स्थिति को भी उजागर करता है। स्कूल की स्थिति बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रही है।विद्यालय का एकमात्र कमरा पांच कक्षाओं के संचालन के लिए उपयोग होता है, जो शिक्षा विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।

 

Balod News : परिसर में जमा कचरा और गंदगी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है और असुरक्षित माहौल बनाता है। बरसात में जलभराव की समस्या कक्षाओं को पूरी तरह ठप कर देती है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के बावजूद, स्कूल में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, डेस्क, और पुस्तकें जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। शिक्षकों की कमी इस समस्या को और गंभीर बनाती है, क्योंकि एक शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को असंभव बनाता है।

Balod News : स्थानीय ग्रामीणों ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कलेक्टर कार्यालय, जनसुनवाई मंच, और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतें की हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता निराशाजनक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विष्णु देव साय सरकार ग्रामीण स्कूलों की जानबूझकर उपेक्षा कर रही है। उनका मानना है कि सरकार गरीब बच्चों को शिक्षित होने से रोककर अपनी सत्ता को सुरक्षित रखना चाहती है। यह आरोप न केवल खैरा की समस्या को उजागर करता है, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत में शिक्षा के प्रति सरकारी लापरवाही को दर्शाता है।

Balod News : यह समस्या केवल खैरा तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण स्कूल समान उपेक्षा का शिकार हैं। शिक्षा, जो बच्चों के भविष्य की नींव है, संसाधनों के अभाव और सरकारी उदासीनता के कारण खतरे में है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे जनआंदोलन शुरू करेंगे।यह स्थिति विचारणीय है कि जब देश में शिक्षा को मौलिक अधिकार माना जाता है, तब भी ग्रामीण बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों हैं?

Balod News : सरकार को शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा। खैरा जैसे स्कूलों की स्थिति सुधारना केवल बच्चों के भविष्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है। ठोस कदम उठाकर सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिले।

 

 

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *