Monday, September 28, 2026
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Balod National Jamboree Controversy : बालोद जम्बूरी पर उठते सवाल : जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में क्यों भेजे गए 10 करोड़, सरकार की चुप्पी पर सवाल

Balod National Jamboree Controversy : रायपुर/बालोद | छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रही राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी अब खेल और सौहार्द का संगम होने के बजाय विवादों और घोटालों का अखाड़ा बन चुकी है। नवा रायपुर के बजाय अचानक बालोद में शिफ्ट किए गए इस आयोजन ने प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। सरकार की चुप्पी और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की भूमिका पर उठते सवालों ने इस पूरे उत्सव को संदेह के घेरे में ला दिया है।

1. टेंडर से पहले निर्माण: जादू या जालसाजी?

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि जब निर्माण कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई, तो जम्बूरी स्थल पर करोड़ों रुपये का बुनियादी ढांचा कैसे बनकर तैयार हो गया? बिना वर्क ऑर्डर (Work Order) के निजी ठेकेदारों ने किसके आदेश पर काम शुरू किया और उन्हें भुगतान की गारंटी किसने दी? यह सीधे तौर पर वित्तीय अनुशासनहीनता का मामला है।

2. 10 करोड़ का ‘डेस्टिनेशन’ बदला: डीईओ के खाते में राशि क्यों?

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि नियमों को ठेंगा दिखाते हुए 10 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्काउट गाइड के अधिकृत खाते के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), बालोद के खाते में भेज दी गई। जनता यह पूछ रही है कि जब संस्था का अपना स्वायत्त खाता है, तो सरकारी नियमों के विरुद्ध जाकर फंड को डायवर्ट करने के पीछे असली मंशा क्या है? क्या यह ऑडिट से बचने का कोई नया तरीका है?

3. ‘अवैध’ अध्यक्षता: स्वायत्तता पर सरकारी हथौड़ा

स्काउट गाइड की नियमावली स्पष्ट करती है कि अध्यक्ष का चुनाव परिषद द्वारा किया जाता है। लेकिन आरोप है कि शासन ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर निर्वाचित व्यवस्था को दरकिनार किया और सीधे शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया। संस्था की स्वायत्तता को कुचलने के इस प्रयास ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

4. अभनपुर जमीन घोटाला: 7 लाख की जमीन 57 लाख में!

विवादों की कड़ी 2014-2019 के उस दौर से भी जुड़ रही है, जब गजेंद्र यादव स्काउट गाइड के कमिश्नर थे।

  • सर्किल रेट बनाम खरीद रेट: अभनपुर में जिस जमीन का सरकारी रेट (सर्किल रेट) महज 7 लाख रुपये प्रति एकड़ था, उसे 57 लाख रुपये प्रति एकड़ की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा गया।

  • साठगांठ का खेल: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह जमीन संस्था के ही तत्कालीन कोषाध्यक्ष से खरीदी गई। यह स्पष्ट रूप से ‘आपसी लाभ’ (Conflict of Interest) का मामला है, जिसे सालों तक फाइलों में दबाकर रखा गया।

जनता के सवाल:

  • क्या यह आयोजन केवल ठेकेदारों और रसूखदारों को उपकृत करने का जरिया है?

  • सरकार उन दावों पर चुप क्यों है जहाँ सर्किल रेट से 8 गुना अधिक दाम पर जमीन खरीदी गई?

  • क्या शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर लगे इन आरोपों की कोई उच्च स्तरीय जांच होगी?

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VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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