सिडनी ओपेरा हाउस में लहराया भारतीय संस्कृति का परचम, बागेश्वर सरकार का ऐतिहासिक संबोधन

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क :  ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित सिडनी ओपेरा हाउस में उस समय एक विशेष और यादगार क्षण देखने को मिला, जब बागेश्वर धाम सरकार के संबोधन के दौरान पूरा सभागार ‘सनातन’ के जयघोष से गूंज उठा। इस आयोजन में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों के साथ-साथ स्थानीय ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी शामिल हुए, जो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को जानने के इच्छुक थे।कार्यक्रम की शुरुआत भारत और ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसने वैश्विक एकता और सम्मान का संदेश दिया।

भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम

कार्यक्रम के प्रारंभ में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद ‘बागेश्वर बालाजी’ के जयघोष से सभागार गूंज उठा।

मंच पर बागेश्वर सरकार के आगमन पर उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

वैश्विक मंच से सनातन का संदेश

अपने संबोधन में बागेश्वर सरकार ने सनातन संस्कृति, भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक व्यापक और सकारात्मक दृष्टि है।उनका यह संदेश विदेशों में रह रहे भारतीयों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम बना।

न्यू साउथ वेल्स संसद में मिला सम्मान

14 अप्रैल 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में न्यू साउथ वेल्स की संसद ने बागेश्वर सरकार को उनके आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया।सम्मान-पत्र में उल्लेख किया गया कि उनके कार्यों ने सांस्कृतिक संवाद, पारस्परिक समझ और वैश्विक मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

सांस्कृतिक सेतु बना आयोजन

यह आयोजन केवल एक भाषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय और वैश्विक समाज के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु के रूप में उभरा।ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि और सम्मान इस कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

सिडनी ओपेरा हाउस में आयोजित यह कार्यक्रम और न्यू साउथ वेल्स संसद में मिला सम्मान न केवल बागेश्वर सरकार के लिए, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।यह घटना इस बात का संकेत है कि सनातन संस्कृति अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और प्रभाव को लगातार मजबूत कर रही है।

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