Thursday, August 20, 2026
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Middle East Conflict : सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बड़ा हमला, ईरान का एवाक्स विमान तबाह करने का दावा

Middle East Conflict : रियाद/वाशिंगटन (29 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिका के एक प्रमुख सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर शनिवार को किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिका का एक बहुमूल्य ई-3 सेंट्री एवाक्स (AWACS) विमान पूरी तरह नष्ट हो गया है। इस हमले में 15 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की भी खबर है।

हमले का विवरण और नुकसान प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने इस सैन्य परिसर पर छह बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 आत्मघाती ड्रोन दागे। हमले में घायल हुए 15 सैनिकों में से पांच की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ तस्वीरों में विमान का मलबा और क्षतिग्रस्त एयरबेस दिखाई दे रहा है, जो सीरियल नंबर 81-0005 वाले विमान के होने का संकेत देते हैं। हालांकि, पेंटागन या अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अभी तक विमान के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

क्या है एवाक्स (AWACS) और इसका महत्व? तबाही की खबरों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिकी वायु सेना के लिए एक अपूरणीय क्षति हो सकती है। एवाक्स विमान को ‘फ्लाइंग रडार’ कहा जाता है, जो 375 किलोमीटर से अधिक के दायरे में दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है। अमेरिकी बेड़े में अब ऐसे केवल 16 विमान शेष हैं। इस विमान का नष्ट होना क्षेत्र में अमेरिका की हवाई निगरानी क्षमता (Air Superiority) पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

बढ़ता क्षेत्रीय तनाव यह हमला तब हुआ है जब रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ईरान के तेल निर्यात के मुख्य केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ पर हमले की योजना बना रहा है। जवाबी कार्रवाई के रूप में ईरान ने सऊदी अरामको की रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ‘द तेहरान टाइम्स’ ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ईरानी धरती पर हमला करने वाले सैनिकों की वापसी केवल ताबूतों में होगी।

पृष्ठभूमि: सऊदी-ईरान-अमेरिका त्रिकोण सऊदी अरब और अमेरिका के बीच का सुरक्षा समझौता और ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं इस संघर्ष के केंद्र में हैं। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है, जबकि सऊदी अरब ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते हुए वाशिंगटन से इस अभियान को जारी रखने का समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना एक पूर्ण युद्ध की चिंगारी बन सकती है।

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