Wednesday, September 30, 2026
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Supreme Court SC Status Verdict : SC-ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर : सुप्रीम कोर्ट ने कहा — “धर्मांतरण के बाद खत्म हो जाती है अनुसूचित जाति की श्रेणी”

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Supreme Court SC Status Verdict : नई दिल्ली (24 मार्च 2026)। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक युगांतकारी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) का संवैधानिक दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वाले व्यक्तियों तक ही सीमित है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपनाता है, तो वह स्वतः ही अनुसूचित जाति श्रेणी के लाभ और दर्जे से वंचित हो जाएगा।

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 का हवाला

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में ‘संवैधानिक आदेश (अनुसूचित जाति), 1950’ की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट प्रावधान है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य पंथ को मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।

“धर्मांतरण के क्षण से ही व्यक्ति की वह जातिगत पहचान समाप्त हो जाती है जो उसे अनुसूचित जाति के तहत विशेष संरक्षण प्रदान करती है।” — सुप्रीम कोर्ट

मामला क्या था? (ईसाई धर्म और SC-ST एक्ट)

यह फैसला एक ईसाई व्यक्ति की याचिका पर आया है, जिसने कुछ लोगों के खिलाफ SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया था।

  • आरोपियों का तर्क: आरोपियों ने कोर्ट में दलील दी कि चूंकि याचिकाकर्ता ने ईसाई धर्म अपना लिया है, इसलिए वह अब ‘अनुसूचित जाति’ का नहीं रहा और उस पर SC-ST एक्ट के तहत सुरक्षा लागू नहीं होती।

  • हाईकोर्ट का रुख: पिछले साल अप्रैल में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं है, इसलिए ईसाई धर्मांतरित व्यक्ति SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं करा सकता।

  • सुप्रीम कोर्ट की मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी।

फैसले के दूरगामी परिणाम

सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद अब ईसाई या इस्लाम जैसे धर्म अपनाने वाले दलितों के लिए अनुसूचित जाति के आरक्षण और विशेष कानूनी सुरक्षा (जैसे SC-ST एक्ट) के रास्ते बंद हो गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक न्याय के ये प्रावधान विशिष्ट धार्मिक ढांचे (हिंदू, सिख, बौद्ध) के भीतर आने वाली जातियों के लिए ही सुरक्षित हैं।

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