Saturday, August 15, 2026
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Live-in Relationship Ruling : बेंगलुरु: पति के ‘अफेयर’ पर न्याय मांगने गई पत्नी को झटका, कोर्ट ने कहा…

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Live-in Relationship Ruling : बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और ‘बिगैमी’ (द्विविवाह) से जुड़े कानूनों पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष अपनी पत्नी के रहते किसी दूसरी महिला के साथ ‘लिव-इन’ रिलेशनशिप या ‘अवैध संबंध’ में रहता है, तो उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत दूसरी शादी नहीं माना जा सकता। इस फैसले से अपने पति के खिलाफ न्याय मांगने गई एक महिला को बड़ा झटका लगा है।

अवैध संबंध और विवाह में अंतर मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंगलुरु पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल साथ रहने या “अवैध रिश्ते” को कानूनी रूप से विवाह की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि IPC की धारा 494 तभी लागू होती है, जब यह साबित हो कि आरोपी ने वास्तव में दूसरी शादी की है। बिना किसी वैध विवाह के साक्ष्य के, इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

[Image representing a legal scale of justice with the Karnataka High Court building in the background]

ट्रायल कोर्ट के आदेश को किया रद्द शिकायतकर्ता पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसके पति के कई अवैध संबंध हैं और वह एक दूसरी महिला के साथ रह रहा है। पत्नी ने पति, दूसरी महिला और यहाँ तक कि अपने ही बच्चों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया था। इससे पहले मैसूरु की एक ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने उसे कानूनी रूप से गलत ठहराते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को ‘क्वैश’ (रद्द) कर दिया।

कोर्ट का तर्क: साक्ष्य अनिवार्य हैं अदालत ने अपने आदेश में कहा:

  • शादी साबित करना जरूरी: शिकायतकर्ता को यह साबित करना अनिवार्य है कि पति ने दूसरी महिला के साथ बाकायदा शादी की है।

  • बच्चों पर आरोप निराधार: पत्नी द्वारा अपने ही बच्चों पर पिता के संबंधों पर चुप रहने का आरोप लगाना कानूनन बिगैमी के दायरे में नहीं आता।

  • संज्ञान का आदेश गलत: ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों के खिलाफ लिया गया संज्ञान कानूनी मानदंडों पर खरा नहीं उतरता।

धारा 494 IPC क्या कहती है? यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है। ऐसी शादी कानूनन शून्य (Void) मानी जाती है और इसके लिए सजा का प्रावधान है। लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि ‘लिव-इन’ या अवैध संबंधों को इस धारा के तहत ‘शादी’ के रूप में दंडित नहीं किया जा सकता।

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