ब्रिटेन से भारत लौटी 500 साल पुरानी मंदिर की मूर्ति, तमिलनाडु में होगी पुनः स्थापना

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : भारत की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्थित एशमोलियन म्यूजियम ने 16वीं सदी की एक दुर्लभ कांस्य मूर्ति भारत को लौटा दी है। यह प्रतिमा लगभग 500 साल पुरानी बताई जा रही है और इसे तमिलनाडु के एक मंदिर से चोरी कर विदेश ले जाया गया था।

अब इस ऐतिहासिक प्रतिमा को भारत लाकर तमिलनाडु के उसी मंदिर में दोबारा स्थापित किया जाएगा, जहां से इसे वर्षों पहले चुराया गया था।

रिसर्च में सामने आई मूर्ति की असली पहचान

जानकारी के अनुसार यह मूर्ति वैष्णव संत थिरुमंगई आळवार की है। इसे वर्ष 1967 में सोथबीज़ (Sotheby’s) के माध्यम से एशमोलियन म्यूजियम ने खरीदा था।

हालांकि वर्ष 2019 में एक शोधकर्ता ने दावा किया कि यह मूर्ति तमिलनाडु के थाडिकोम्बु स्थित श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर की है।

रिसर्च में सामने आया कि यह प्रतिमा मंदिर से चोरी की गई पुरानी तस्वीरों से पूरी तरह मेल खाती है। इसके बाद म्यूजियम प्रशासन ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग से संपर्क किया और जांच प्रक्रिया शुरू हुई।

Read More : MP की खुली जेलों में अब महिलाएं भी सकेंगी रह, आज पुलिस जवान मनाएंगे होली

ASI और तमिलनाडु सरकार ने की पुष्टि

मूर्ति की असली पहचान की पुष्टि के लिए कई संस्थाओं ने जांच की। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), तमिलनाडु सरकार और मंदिर प्रशासन शामिल रहे।

विस्तृत जांच के बाद यह प्रमाणित हुआ कि यह मूर्ति वास्तव में तमिलनाडु के मंदिर से ही चोरी हुई थी। इसके बाद म्यूजियम ने इसे भारत को लौटाने का निर्णय लिया।भारत पहुंचने के बाद ASI द्वारा मूर्ति की तकनीकी जांच की जाएगी और फिर इसे मंदिर में दोबारा स्थापित किया जाएगा।

लंदन में औपचारिक समारोह में सौंपी गई प्रतिमा

4 मार्च को लंदन स्थित इंडिया हाउस में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान यह प्रतिमा भारत को सौंप दी गई।

एशमोलियन म्यूजियम के निदेशक डॉ. ज़ा स्टर्गिस ने कहा कि म्यूजियम ने यह प्रतिमा 1967 में अच्छी नीयत से खरीदी थी। लेकिन बाद में जब यह पता चला कि इसे वैध तरीके से भारत से नहीं लाया गया था, तो इसे वापस करना सही निर्णय माना गया।

पहली बार म्यूजियम ने लौटाई किसी देश की धरोहर

एशमोलियन म्यूजियम दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संग्रहालयों में से एक माना जाता है। यहां दुनिया भर की हजारों ऐतिहासिक वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं।हालांकि यह पहली बार है जब म्यूजियम ने किसी वस्तु को उसके मूल देश को वापस किया है।

ब्रिटेन की हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बैरोनेस थंगम डेबोननेयर ने कहा कि यह सिर्फ एक कला कृति नहीं, बल्कि एक जीवित मंदिर की पवित्र मूर्ति है।इस कार्यक्रम के दौरान भारत को चार अन्य प्राचीन वस्तुएं भी सौंपी गईं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *