निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने धमतरी जिले से जुड़े करीब दो दशक पुराने दुष्कर्म प्रकरण में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी की सजा को आधा कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2005 में आरोपी को बलात्कार के अपराध में सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने संशोधित करते हुए दुष्कर्म के प्रयास की श्रेणी में रखा है।
क्या था मामला
घटना वर्ष 2004 की बताई जाती है, जब आरोपी ने एक युवती को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की थी। आरोप के अनुसार उसने युवती को कमरे में बंधक बनाकर उसके हाथ-पैर भी बांध दिए थे। इस मामले में निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत सात वर्ष और धारा 342 के तहत छह माह की सजा सुनाई थी।
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साक्ष्यों पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने पाया कि पीड़िता के बयान में ‘प्रवेश’ को लेकर स्पष्टता नहीं है और चिकित्सकीय परीक्षण में हाइमेन सुरक्षित पाया गया। अदालत ने कहा कि कानून में पूर्ण प्रवेश अनिवार्य नहीं माना जाता, फिर भी उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म सिद्ध नहीं होता।
धारा बदली, सजा आधी
इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट ने अपराध को धारा 376 से बदलकर धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) के अंतर्गत माना और सजा घटाकर तीन वर्ष छह माह कर दी। हालांकि बंधक बनाने से संबंधित धारा 342 की सजा यथावत रखी गई है तथा दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
आत्मसमर्पण का निर्देश
अदालत ने आरोपी के जमानत बांड निरस्त करते हुए उसे दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। निर्धारित अवधि में सरेंडर न करने पर पुलिस को उसे गिरफ्तार कर शेष सजा पूरी कराने के आदेश दिए गए हैं।













