भोपाल : मध्य प्रदेश में निगम, मंडल, प्राधिकरण और विभिन्न आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से लंबित इन नियुक्तियों को लेकर पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेचैनी बढ़ती जा रही है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है।
दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से अहम चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व से इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि प्रदेश में संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द कोई निर्णय लिया जा सकता है।
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कार्यकर्ताओं की नाराजगी बनी चुनौती
जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं में नियुक्तियों में देरी को लेकर असंतोष देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि अनुभवी नेताओं, संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय संतुलन—सभी पहलुओं को साधते हुए सूची तैयार की जाए।
फैसले पर टिकी राजनीतिक नजरें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय नेतृत्व से मंथन के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज हो सकती है। यदि जल्द निर्णय होता है तो यह संगठनात्मक ऊर्जा बढ़ाने के साथ आगामी राजनीतिक रणनीति को भी मजबूती देगा।

