बड़वानी: महंत बालकमुनि 41 दिन की जलधारा तपस्या में डटे, 108 मटकों से ठंडे पानी का स्नान

Rahul Goshwami

बड़वानी :  बड़वानी जिले के पानसेमल स्थित श्रीराम कुटिया आश्रम में 28 वर्षीय महंत बालकमुनि कोतवाल 41 दिन की कठिन जलधारा तपस्या कर रहे हैं। यह तपस्या उदासीन पंचायत अखाड़ा की परंपरा का हिस्सा है। महंत बालकमुनि प्रतिदिन तड़के 3 बजे ब्रह्ममुहूर्त में 108 मटकों के ठंडे पानी से स्नान करते हैं।

कड़ाके की ठंड में कठिन तपस्या

महंत बालकमुनि ने यह तपस्या 20 दिसंबर 2025 से शुरू की थी। जिले में न्यूनतम तापमान 8–9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। तपस्या के दौरान बालकमुनि एक बड़े मटके के नीचे बैठते हैं और आश्रम के साधक 108 मटकों में भरा ठंडा पानी उसके ऊपर डालते हैं। स्नान की यह प्रक्रिया लगभग दो घंटे तक चलती है।

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बालकमुनि का जीवन और उद्देश्य

बालकमुनि मूल रूप से ठीकरी के ओम कृष्णधाम गोशाला आश्रम से हैं। डेढ़ साल की उम्र में उन्हें उदासीन पंचायत अखाड़ा हरिद्वार को समर्पित किया गया। बालकमुनि का उद्देश्य गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करना और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है। इसके साथ ही वे प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की भावना से यह तपस्या कर रहे हैं।

आश्रम और साधकों का योगदान

तपस्या गुरु के मार्गदर्शन में श्रीराम कुटिया आश्रम में हो रही है, जो ब्राह्मलीन मां आरतीदास उदासीन महाराज का समाधि स्थल भी है। सेवादार जैसे सियाराम बापू, संजीव मंडलोई, खंडू मंडलाई, रविंद्र वाडिले, सचिन, विजय मोहोले और सेवाराम प्रतिदिन मटकों में पानी डालकर महंत बालकमुनि की तपस्या में योगदान देते हैं।

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