Wednesday, August 19, 2026
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Ram Rahim Parole Controversy : राम रहीम की पैरोल का ‘रिकॉर्ड कार्ड’: जेल कम, बाहर ज्यादा; आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?

Ram Rahim Parole Controversy : नई दिल्ली: बलात्कार और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या जैसे जघन्य अपराधों में 20 साल और उम्रकैद की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर सुनारिया जेल से बाहर आने की अनुमति मिल गई है। इस बार भी उसे 40 दिन के लिए पैरोल दी गई है।

पैरोल या ‘पिकनिक’? आंकड़ों की जुबानी

गुरमीत राम रहीम को अगस्त 2017 में सजा हुई थी। तब से अब तक का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है:

  • कुल समय: सजा के शुरुआती 8 साल 4 महीने।
  • जेल से बाहर: 387 दिन (लगभग 13 महीने)।
  • अवसर: 15 बार रिहाई।
  1. पहली बार: 24 अक्टूबर, 21 – बीमार मां से मिलने के लिए एक दिन की पैरोल मिली थी.
  2. – दूसरी बार: 21 मई, 2021 – बीमार मां से मिलने के लिए ही फिर एक दिन के लिए जेल से बाहर आया.
  3. – तीसरी बार: 7 फरवरी, 22 – 21 दिन के लिए जेल से बाहर. तब पंजाब में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे.
  4. – चौथी बार: 17 जून, 22 – 30 दिन के लिए. उन दिनों हरियाणा में निकाय चुनाव हुए थे.
  5. – पांचवीं बार: 15 अक्टूबर, 22 – 40 दिन के लिए. उस दौरान आदमपुर उपचुनाव हुआ था.
  6. – छठी बार: 21 जनवरी 23 – शाह सतनाम जयंती के वक्त 40 दिन के लिए.
  7. – सातवीं बार: 20 जुलाई, 23 – 30 दिन के लिए. 15 अगस्त को गुरमीत का बर्थडे होता है.
  8. – आठवीं बार: 21 नवंबर, 23 – 21 दिन के लिए, उस समय राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए थे.
  9. – नौवीं बार: 19 जनवरी, 24 – 50 दिन के लिए. मौका लोकसभा चुनाव का था.
  10. – दसवीं बार: 13 अगस्त, 24 – 21 दिन के लिए, 15 अगस्त को बर्थडे पड़ता है.
  11. – ग्यारहवीं बार: 1 अक्टूबर, 24 – 21 दिन के लिए, संयोग मानिए तो उन दिनों हरियाणा में चुनाव हो रहे थे.
  12. – बारहवीं बार: 28 जनवरी, 25 : 30 दिन के लिए. चुनाव के हिसाब से देखें तो दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे.
  13. – तेरहवीं बार: 9 अप्रैल, 25 – 41 दिन के लिए. तब डेरा सच्चा सौदा का स्थापना दिवस मनाया गया.
  14. – चौदहवीं बार: 5 अगस्त, 2025: 40 दिन के लिए. मौका तो 15 अगस्त को बर्थडे का ही था.
  15. – पंद्रहवीं बार: 3 जनवरी, 2025 – फिर से 40 दिन के लिए.

पैरोल की टाइमिंग और ‘संयोग’

हैरानी की बात यह है कि राम रहीम की पैरोल अक्सर विशेष मौकों या राजनीतिक घटनाक्रमों के इर्द-गिर्द घूमती है:

  1. चुनाव कनेक्शन: अब तक 6 बार पैरोल तब मिली जब पंजाब, हरियाणा या राजस्थान में चुनाव (विधानसभा, लोकसभा या उपचुनाव) होने वाले थे।

  2. जन्मदिन और उत्सव: 3 बार उसे सिर्फ 15 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाने के लिए बाहर भेजा गया। डेरा के स्थापना दिवस पर भी उसे 41 दिन की पैरोल मिली।

  3. पारिवारिक कारण: शुरुआत में बीमार मां से मिलने के नाम पर 1-1 दिन की पैरोल मिली थी, लेकिन अब यह अवधि 21 से 50 दिनों तक बढ़ गई है।

आसाराम बनाम राम रहीम: अलग-अलग मापदंड?

रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि समान प्रकृति के अपराध में सजा काट रहे आसाराम बापू को जेल से बाहर आने में एक दशक लग गया और उन्हें केवल मेडिकल ग्राउंड पर ही अंतरिम जमानत मिल सकी। वहीं, राम रहीम के लिए पैरोल का रास्ता इतना आसान है जैसे किसी थाने में हाजिरी लगाना।

सिख समुदाय और पीड़ितों का आक्रोश

  • जख्मों पर नमक: दमदमी टकसाल के ज्ञानी राम सिंह खालसा ने इसे ‘जख्मों पर नमक छिड़कना’ बताया है। उन्होंने सवाल किया कि जहां सिख कैदियों की रिहाई पर चुप्पी है, वहीं एक बलात्कारी को बार-बार बाहर क्यों लाया जा रहा है?

  • न्याय पर सवाल: उन्नाव रेप पीड़िता और बिलकिस बानो केस का उदाहरण देते हुए यह बताया गया है कि कैसे रसूखदार अपराधियों को मिलने वाली राहत पीड़ितों की पीड़ा को बढ़ा देती है।

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