Liquor scam case : नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की याचिका पर सुनवाई जनवरी 2025 के पहले सप्ताह तक के लिए टाल दी है। चैतन्य बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।
Liquor scam case : चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के समक्ष चैतन्य बघेल का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सिब्बल ने दलील दी कि जांच एजेंसियां बार-बार नए वारंट जारी कर लोगों को निशाना बना रही हैं। उन्होंने कहा, “यह सिलसिला लगातार नहीं चल सकता। जांच के नाम पर लोगों को चुन-चुनकर गिरफ्तार किया जा रहा है और बिना किसी तय समयसीमा के दमनकारी कदम उठाए जा रहे हैं।”
Liquor scam case : वहीं, ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि हिरासत में रहते हुए ‘दमनकारी कदमों’ की बात करना तर्कहीन है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई टुकड़ों में नहीं की जा सकती, इसलिए विस्तृत सुनवाई अगले साल जनवरी में की जाएगी।
Liquor scam case : गौरतलब है कि चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराया गया था। इस मामले के साथ ही प्रदेश में महादेव सट्टा एप, कोयला और चावल मिल घोटाले जैसे कई मामलों की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है, जो भूपेश बघेल के कार्यकाल से जुड़े बताए जा रहे हैं।
Liquor scam case : इसी दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती दी है। पुनिया की याचिका ने चुनाव पूर्व प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर आने वाले समय में बड़ी कानूनी बहस होने की उम्मीद है।













