Big News : खत्म हो रहा ‘लाल आतंक’! 2019 से अब तक 29 टॉप नक्सली ढेर, 5,500 से ज्यादा सरेंडर

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Amit Shah
Amit Shah

नई दिल्ली : लोकसभा में गृह मंत्रालय ने मंगलवार को वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सल हिंसा के उन्मूलन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की। सरकार ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार और सटीक कार्रवाई से नक्सली संगठनों की ताकत बुरी तरह कमजोर हुई है। हजारों कैडर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।

नक्सलियों की विचारधारा लोकतंत्र विरोधी: गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि वामपंथी उग्रवादी न तो भारतीय संविधान में विश्वास रखते हैं और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों में। मंत्रालय के अनुसार, इन उग्रवादियों ने दशकों तक निर्दोष नागरिकों पर हमले किए, महिलाओं को विधवा किया और बच्चों को अनाथ छोड़ा।सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्रवाई के बाद इन संगठनों का नेटवर्क ध्वस्त हो रहा है और उनका प्रभाव लगातार घट रहा है।

2019 के बाद से 29 शीर्ष नक्सली कमांडर मारे गए
सरकार ने बताया कि जून 2019 से अब तक 29 टॉप नक्सली लीडर्स को ढेर किया जा चुका है, जिनमें से 14 कमांडर सिर्फ इस साल मारे गए।
इसके अलावा:

  • 1,106 उग्रवादी मारे गए
  • 7,311 गिरफ्तार हुए
  • 5,571 ने आत्मसमर्पण किया

मंत्रालय ने कहा कि यह आंकड़े साबित करते हैं कि सुरक्षा ऑपरेशन्स पूरी तरह प्रभावी हो चुके हैं और नक्सलवाद की जड़ें तेजी से कमजोर हो रही हैं।

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समर्पण करने वालों के लिए विशेष पुनर्वास योजना
सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए व्यापक योजनाएं लागू की हैं।
इनमें शामिल हैं:

  • उच्च कैडर को 5 लाख रुपये
  • अन्य कैडर को 2.5 लाख रुपये
  • हथियार जमा करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि
  • 3 साल तक 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता

राज्यों को भी अपनी-अपनी पुनर्वास नीतियां मजबूत करने के लिए कहा गया है। इन नीतियों के तहत महिलाओं, बच्चों, घायल व दिव्यांगों, और पूर्व सहयोगियों को विशेष राहत, शिक्षा और आजीविका सहायता प्रदान की जा रही है।

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2025 में अब तक 2,167 माओवादी मुख्यधारा में लौटे
गृह मंत्रालय ने बताया कि सिर्फ इसी वर्ष 2,167 माओवादी पुनर्वास योजना का लाभ लेकर समाज में लौट चुके हैं।सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।

1967 से जारी संघर्ष, अब सिमटता ‘रेड कॉरिडोर’
मंत्रालय ने बताया कि नक्सल समस्या 1967 में नक्सलबाड़ी आंदोलन से शुरू हुई थी। समय के साथ यह ‘रेड कॉरिडोर’ के रूप में बेहद विस्तृत हो गई थी, लेकिन आज यह क्षेत्र काफी सीमित रह गया है।सरकार ने दावा किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व में मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूरी तरह उन्मूलन कर दिया जाएगा।

 

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