crops submerged : नहर रिसाव से 6 एकड़ फसल जलमग्न, किसान का खेत दलदल में तब्दील

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crops submerged : बड़वानी। जिले के ग्राम लोनसरा में नहर से हो रहे लगातार रिसाव ने किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। नहर का पानी खेतों में भर जाने से किसान किशोर मुकाती की करीब 6 एकड़ जमीन दलदल में बदल गई है, जिससे उनकी खड़ी फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं। खेतों में भरे पानी ने कृषि गतिविधियां पूरी तरह रोक दी हैं और किसान को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

किशोर मुकाती ने बताया कि उनकी जमीन पर 4 एकड़ में मक्का और 2 एकड़ में भिंडी की फसल लगाई गई है। फसल की शुरुआती लागत ही करीब 60 से 70 हजार रुपये हो चुकी है, लेकिन नहर रिसाव की समस्या के कारण यह पूरी मेहनत पानी में जाती दिख रही है। मुकाती के अनुसार, यह समस्या पिछले तीन–चार वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इस बार रिसाव इतने बड़े स्तर पर हो रहा है कि पूरा खेत तालाब में तब्दील हो गया है।

crops submerged : किसानों का आरोप है कि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से नहरों का निर्माण कराया गया था, लेकिन निम्न गुणवत्ता, मरम्मत की कमी और रखरखाव के अभाव के चलते कई स्थानों पर नहरें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। नहरों में जंगली झाड़ियाँ व कचरा जमा होने से पानी का दबाव बढ़ जाता है, जिससे रिसाव की घटनाएँ और बढ़ रही हैं। खेतों तक पहुंचा यह पानी फसलों को सड़ाने लगा है।

किशोर मुकाती का कहना है कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। किसान का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा सिर्फ मौका मुआयना किया जाता है, लेकिन वास्तविक मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया जाता।

crops submerged : ग्रामीणों के अनुसार, जब नहर बंद रहती है तो रिसाव कम दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही नहर चालू होती है और पानी का बहाव बढ़ता है, किसानों के खेत तालाब की तरह भर जाते हैं। एक अन्य किसान मोतीलाल मुकाती ने भी इसी तरह की समस्याएं बताते हुए कहा कि सीपेज के कारण पानी तेजी से खेतों में भर जाता है और उनकी फसलें खराब हो रही हैं।

किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द नहर की मरम्मत कराने और फसलों को हो रहे नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी किसानों की फसलें बर्बाद हो सकती हैं।

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