Basant Panchami : धार : धार में ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिन्दू समाज ने आज जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय संस्कृति मंत्री सहित एएसआई (अखिल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा है। समाज की मांग है कि 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश के अनुसार बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026) के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।
भोजशाला, जिसे कभी राजा भोज ने शारदा सदन के रूप में स्थापित किया था, माँ सरस्वती की उपासना का प्रमुख केंद्र रही है। ज्ञापन में समाज ने उल्लेख किया कि सन् 1034 में राजा भोज ने यहाँ माँ वाग्देवी की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। ब्रिटिश शासन ने 1904 में इसे संरक्षित धरोहर घोषित किया और 1952 में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने इसे राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक बनाया।
Basant Panchami 7 अप्रैल 2003 को एएसआई ने आदेश जारी किया था कि प्रत्येक मंगलवार और बसंत पंचमी हिन्दू समाज को पूजा-अर्चना का अधिकार रहेगा, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी जाएगी। हिन्दू समाज का कहना है कि 2006, 2013 और 2016 में इस आदेश की मूल भावना का पालन नहीं हुआ, जिससे असंतोष फैल गया और कई बार कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ी।
महामंडलेश्वर नरसिंगदास महाराज ने कहा, “हमारी मांग बस इतनी है कि एएसआई के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाए। बसंत पंचमी माँ सरस्वती का जन्मोत्सव है, और हम चाहते हैं कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति मिले।”
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पूजा-अर्चना की यह व्यवस्था लागू होने से क्षेत्र में शांति बनी रहेगी और किसी अन्य धार्मिक गतिविधि को कोई हानि नहीं होगी। हेमंत दौराया, महाप्रबंधक भोज उत्सव समिति ने कहा कि प्रशासन से अनुरोध है कि बसंत पंचमी पर किसी भी प्रकार की बाधा न आए और व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर लिया है और इसे उच्च स्तर पर कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। 2003 के आदेश के अनुसार बसंत पंचमी पर पूजा का अधिकार सुनिश्चित होगा या नहीं, यह अब देखना बाकी है। इसके अलावा, भोजशाला के टाइटल को लेकर मामला कोर्ट में है। एएसआई ने इंदौर उच्च न्यायालय के निर्देश पर 98 दिनों तक सर्वेक्षण किया है। सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण निर्णय अब तक नहीं आया, लेकिन जल्द ही भोजशाला के टाइटल का फैसला आने की संभावना है।











