GST 2.0 : रायपुर : देशभर में GST 2.0 लागू हो गई है। सरकार का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर टैक्स में राहत देना और उनकी कीमतों में कमी लाना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के एडवोकेट जे.के. मित्तल ने निशानेबाज न्यूज से विशेष बातचीत में कहा कि नई व्यवस्था का प्रभाव सभी क्षेत्रों पर समान नहीं पड़ा है।
GST 2.0 : मित्तल के अनुसार, कार डीलर्स, कोयला व्यवसाय, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को नई टैक्स प्रणाली से नुकसान हुआ है। वहीं, आम जनता को उम्मीद के अनुरूप राहत नहीं मिली है — साबुन, शैम्पू और अन्य रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतों में कोई खास कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए GST 2.0 की दरों की पुनः समीक्षा करे ताकि इसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच सके।
GST 2.0 : सवाल: जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद सरकार का क्या उद्देश्य बताया जा रहा है?
GST 2.0 : जवाब: सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का मकसद रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर टैक्स कम कर आम उपभोक्ता को राहत देना और वस्तुओं की कीमतों में कमी लाना है।
GST 2.0 : एडवोकेट जे.के. मित्तल के अनुसार, अभी तक इसका असर आम जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में कोई खास अंतर नहीं दिख रहा है। मित्तल ने बताया कि कार डीलर्स, कोयला व्यवसाय, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को जीएसटी 2.0 से नुकसान झेलना पड़ा है। इन क्षेत्रों में टैक्स दरों के पुनर्गठन से इनपुट क्रेडिट में कमी आई है, जिससे लागत बढ़ी है।
GST 2.0 : राहत बहुत सीमित दायरे में रही है। कुछ वस्तुओं पर टैक्स घटने के बावजूद खुदरा बाजार में दाम घटे नहीं हैं, क्योंकि व्यापारी और निर्माता अब भी पुराने मार्जिन के हिसाब से कीमत तय कर रहे हैं।
GST 2.0 : उन्होंने कहा कि सरकार को उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए जीएसटी 2.0 की दरों और प्रावधानों की पुनः समीक्षा करनी चाहिए ताकि इसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचे। साथ ही, उद्योगों की समस्याओं पर विचार कर नीतियों को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।