Rewa News : रीवा, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का एक स्पष्ट आदेश, जिसमें रास्ते का अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था, अब सिर्फ़ कागज़ का टुकड़ा बनकर रह गया है। यह पूरा मामला रायपुर कर्चुलियान जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम महसुआ का है, जहाँ एक आम रास्ते पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए याचिकाकर्ता पिछले कई महीनों से राजस्व अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है।
Rewa News : याचिकाकर्ता के पुत्र, भास्कर मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि शासकीय अभिलेखों में दर्ज 10 फीट के आम रास्ते पर उनके पड़ोसियों ने अवैध अतिक्रमण कर रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
हर कोर्ट से जीत, ज़मीन पर हार
मामले की गंभीरता यह है कि यह प्रकरण राजस्व विभाग, उच्च न्यायालय, और यहाँ तक कि रेवेन्यू बोर्ड ग्वालियर तक चला है।
- न्यायालयों का फैसला: इन सभी न्यायिक मंचों ने अतिक्रमण को अवैध मानते हुए जिला प्रशासन और राजस्व के अधिकारियों को रास्ता तुरंत अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश जारी किए थे।
- मौजूदा हालात: इसके बावजूद, ज़मीन पर अतिक्रमण के हालात जस के तस हैं।
‘पुलिस-राजस्व’ की आँख-मिचौली में फंसा पीड़ित
पीड़ित परिवार का कहना है कि जब वे उच्च न्यायालय के आदेश के साथ राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार/एसडीएम) के पास जाते हैं, तो उन्हें पुलिस बल की मांग करने के लिए स्थानीय थाने में भेजा जाता है।
- पुलिस का जवाब: जब वे थाने में जाते हैं, तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है कि ‘पुलिस बल की मांग करने का अधिकार तहसीलदार को है।’
इस बेबसी और लाचारी के आलम में, याचिकाकर्ता राजस्व और पुलिस के बीच चक्कर लगाने को मजबूर है, और उच्च न्यायालय का आदेश केवल न्याय का उपहास बनकर रह गया है।













