CG NEWS: फकरे आलम खान, बचेली : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आज 24 सितंबर 2025 को एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। बस्तर संभाग में चल रहे आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास अभियान *”पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन”* और दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे *”लोन वर्राटू – घर वापस आइए”* अभियान से प्रेरित होकर कुल 71 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 30 इनामी माओवादी (कुल इनाम राशि ₹64 लाख) शामिल हैं। इनमें 21 महिलाएं और 50 पुरुष माओवादी शामिल हैं। उन्होंने आत्मसमर्पण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया।
CG NEWS: प्रमुख आत्मसमर्पित माओवादी और उनका आपराधिक इतिहास:
बामन मड़काम (₹8 लाख इनामी): कई मुठभेड़ों में शामिल
शमिला उर्फ सोमली कवासी (₹5 लाख इनामी): टावर जलाने व मुठभेड़ की आरोपी
गंगी उर्फ रोहनी बारसे (₹5 लाख इनामी): भामरागढ़ मुठभेड़ में शामिल
देवे उर्फ कविता माड़वी (₹5 लाख इनामी): जिरम मुठभेड़ में शामिल
जोगा मड़काम (₹2 लाख इनामी): गोगुंडा व मार्जूम मुठभेड़ में शामिल
कई अन्य माओवादी बंद, पोस्टर, रोड काटने जैसी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे
CG NEWS: अभियान की सफलता में योगदान देने वाले अधिकारीगण:
सुंदरराज पी. (पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज)
कमलोचन कश्यप (उप पुलिस महानिरीक्षक, दंतेवाड़ा रेंज)
गौरव राय (पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा)
रामकुमार बर्मन, उदित पुष्कर (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक)
राकेश चौधरी (DIG, CRPF), CRPF की 111वीं, 195वीं, 230वीं, 231वीं बटालियन के अधिकारी
CG NEWS: आत्मसमर्पण के बाद माओवादियों को सरकार द्वारा मिलने वाली पुनर्वास सुविधाएं:
₹50,000 की प्रारंभिक सहायता
कौशल विकास प्रशिक्षण
स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन
कृषि भूमि, मनोवैज्ञानिक परामर्श
सुरक्षा एवं सामाजिक पुनर्स्थापना
“लोन वर्राटू” और “पूना मारगेम” का असर:
“लोन वर्राटू” अभियान के तहत अब तक 1113 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया
इनमें 297 इनामी माओवादी
226 महिलाएं और 887 पुरुष माओवादी
पिछले 19 महीनों में दंतेवाड़ा जिले में 129 इनामी माओवादी सहित कुल 461 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं
CG NEWS: अभियान का संदेश:
हर किसी को वापसी का अवसर मिलना चाहिए।
“पूना मारगेम” और “लोन वर्राटू” जैसे अभियान यह विश्वास पैदा करते हैं कि हिंसा और शोषण की राह छोड़कर शांति, विकास और सम्मान का मार्ग अपनाया जा सकता है।
दंतेवाड़ा पुलिस व प्रशासन की अपील:
अपने परिवार, समाज और देश के लिए
हिंसा त्यागें
लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताएं
पुनर्वास व सम्मान के साथ एक नई शुरुआत करें
हिंसा का मार्ग छोड़िए, शांति और सम्मान की राह अपनाइए – अपने और बस्तर के भविष्य के लिए।











