Saturday, August 29, 2026
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Former PM KP Oli FIR : नेपाल की सत्ता संभालते ही सुशीला कार्की ने लिया ताबड़तोड़ एक्शन, पूर्व PM केपी ओली के खिलाफ FIR

काठमांडू : नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सत्ता संभालते ही पहले ही 24 घंटे में राजनीतिक और प्रशासनिक एक्शन की शुरुआत कर दी। उनके कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन, 8 सितंबर 2025 को, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ पुलिस दमन के विरोध में FIR दर्ज की गई। इसमें गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोप शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले ओली ने जनजातीय युवाओं के आक्रोश और Gen Z के विरोध प्रदर्शन के चलते 9 सितंबर को इस्तीफा देना पड़ा। यह विरोध प्रदर्शन देशभर में व्यापक था, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों में आग लगाने और पुलिस दमन का विरोध किया था।

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कैबिनेट विस्तार की तैयारी

सुशीला कार्की के करीबी सूत्रों ने बताया कि अंतरिम सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार कल (रविवार) किया जा सकता है। शनिवार को उन्होंने Gen Z प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया। यह व्यापक संवाद नए मंत्रियों के चयन में सहयोग और जनसमर्थन जुटाने की रणनीति के तहत किया गया।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि नए कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे सरकार की स्थिरता और लोकप्रियता बढ़ सके। नामों की घोषणा और शपथ ग्रहण एक ही दिन होने की संभावना है।

इतिहास रचा सुशीला कार्की ने

12 सितंबर 2025 का दिन नेपाल के लिए ऐतिहासिक रहा क्योंकि सुशीला कार्की देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं। इससे पहले कभी भी किसी महिला ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार नहीं संभाला।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुशीला कार्की का सत्ता में आगमन महिला सशक्तिकरण का स्पष्ट उदाहरण है। उनके इस कदम से नेपाल में राजनीति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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नेपाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, पिछले विरोध प्रदर्शन और ओली सरकार के भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों के मद्देनजर सुशीला कार्की की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई संकेत देती है कि नई अंतरिम सरकार तीव्र निर्णय और जवाबदेही की नीति अपनाने वाली है। FIR दर्ज कर केपी ओली पर कार्रवाई, महिला नेतृत्व के साहस और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से यह भी स्पष्ट होता है कि नए प्रशासन की प्राथमिकता लोकतंत्र की रक्षा, कानून की श्रेष्ठता और सामाजिक न्याय पर होगी।

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