Saturday, August 15, 2026
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Malegaon Case : 17 साल बाद मालेगांव केस में आया बड़ा फैसला, जानें कोर्ट ने क्या-क्या कहां?….

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Malegaon Case
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मुंबई | Malegaon Case : मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने मालेगांव बम धमाके मामले में 17 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ‘शक की बुनियाद पर सजा नहीं दी जा सकती’ और ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, क्योंकि कोई भी धर्म हिंसा की इजाजत नहीं देता।’

Malegaon Case : कोर्ट ने किन बिंदुओं पर दिया फैसला?

विशेष न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने 1000 पन्नों के विस्तृत आदेश में अभियोजन पक्ष की जांच में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया। अदालत ने कहा कि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक के प्रज्ञा ठाकुर से जुड़े होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। वहीं, कर्नल पुरोहित के घर से आरडीएक्स बरामदगी का दावा भी साबित नहीं हो सका। कोर्ट के मुताबिक, विस्फोट स्थल की सही तरीके से मैपिंग नहीं की गई थी और फॉरेंसिक जांच में कई खामियां थीं।

यूएपीए लागू नहीं: अदालत

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस केस में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराएं लागू नहीं हो सकतीं, क्योंकि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि “धमाके की साजिश रचने और उसमें शामिल होने को लेकर कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत रिकॉर्ड में नहीं है।”

पीड़ितों ने जताई नाराजगी

विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। मृतक फरहीन शेख के पिता लियाकत शेख ने कहा, “हमारी बेटी वड़ा पाव लेने गई थी, वो कभी लौटकर नहीं आई… आज 17 साल बाद भी हमें न्याय नहीं मिला।”

क्या था मालेगांव धमाका?

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिल में विस्फोटक रखा गया था, जिसमें 6 लोगों की जान गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। एनआईए ने इस केस में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित सहित सात लोगों पर यूएपीए और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए थे।

फैसले का असर और अगला कदम

इस फैसले से एक ओर जहां आरोपियों ने राहत की सांस ली है, वहीं पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके घाव और गहरे हो गए हैं। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी पर टिकी हैं।

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