Thursday, August 20, 2026
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Shiv Temple : चारों दिशाओं में शिव के दिव्य धाम, हर मंदिर के पीछे है अनोखी मान्यता

Shiv Temple
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Shiv Temple : भिलाई जिले में शिवभक्ति की गूंज हर दिशा से सुनाई देती है। यहां हजारों शिव मंदिर हैं, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जिले के चारों कोनों में अलग-अलग स्वरूपों में शिव विराजमान हैं — कहीं स्वयंभू शिवलिंग के रूप में, तो कहीं सजीव मूर्ति के रूप में।

Shiv Temple : पूर्व में देवबलौदा, पश्चिम में नगपुरा, उत्तर में शिवकोकड़ी और सहसपुर, दक्षिण में कोही, और अन्य क्षेत्रों में धमधा और कोड़िया के मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।

Shiv Temple : नगपुरा का शिव मंदिर — कलचुरीकालीन स्थापत्य की मिसाल

Shiv Temple : नगपुरा गांव में स्थित यह शिव मंदिर पंचरथ योजना पर आधारित है और 12वीं सदी में कलचुरी वंश के शासनकाल में निर्मित हुआ। मंदिर पूर्वाभिमुख है और गर्भगृह में शिवलिंग विराजमान हैं। महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि जो भी यहां सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

 

Shiv Temple : सहसपुर का यूद्देश्वर महादेव मंदिर — नागर शैली का अद्भुत उदाहरण

Shiv Temple : 13वीं–14वीं शताब्दी में फणी नागवंशी राजाओं द्वारा बनवाया गया यह मंदिर अपनी नागर शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंडप सोलह स्तंभों पर आधारित है और गर्भगृह में शिवलिंग प्रतिष्ठित है। भक्तगण विवाह, संतान, स्वास्थ्य और कारोबार में सफलता की कामना के साथ यहां पूजन करने आते हैं।

Shiv Temple : कौही का स्वयंभू शिवलिंग — जिसका कोई छोर नहीं

Shiv Temple : पाटन ब्लॉक के कौही गांव में खारून नदी किनारे स्थित यह मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि शिवलिंग जमीन के अंदर लगातार बढ़ रहा है — अब तक 25 फीट खुदाई में भी इसका अंतिम सिरा नहीं मिला। दर्शन मात्र से मनोकामना पूर्ण होने की आस्था है। विशेषकर कन्याएं विवाह की और दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना के लिए यहां आते हैं।

Shiv Temple : शिवकोकड़ी का भुईफोड़ महादेव — जहां न्योता सबसे पहले शिव को

Shiv Temple : आमनेर नदी के तट पर स्थित यह मंदिर लगभग 500 साल पुराना माना जाता है। यहां का शिवलिंग जमीन से फूटा हुआ है और ऊंचाई करीब 10 फीट है। इसे मात माले बाबा भी कहा जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, शादी-ब्याह का पहला निमंत्रण इस मंदिर के शिव को दिया जाता है।

Shiv Temple : देवबलौदा — बिना शिखर का ऐतिहासिक शिव मंदिर

Shiv Temple : 12वीं–13वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर बलुआ पत्थर से बना है और इसका शिखर नहीं है। शिवलिंग भूगर्भ से निकलने की मान्यता है। मंदिर की दीवारों पर खजुराहो की तर्ज पर सुंदर नक्काशी है, जिनमें शिव और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।

Shiv Temple : महिलाओं द्वारा संतान की और कन्याओं द्वारा योग्य वर की प्राप्ति की कामना के लिए यह स्थान विशेष रूप से श्रद्धा का केंद्र है। इन मंदिरों की विविधता, स्थापत्य और आस्था से स्पष्ट है कि भिलाई सिर्फ औद्योगिक नगरी नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की भी एक समृद्ध भूमि है।

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