धनतेरस का त्योहार आज 6 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन सोना-चांदी और बर्तन खरीदने के साथ घर में दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इनमें एक दीपक यमराज के नाम से घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, जिसे यम दीप कहते हैं।
धनतेरस पर 13 दीपक कहां जलाएं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर पहला दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर यमराज के नाम से जलाया जाता है। दूसरा दीपक पूजा घर में माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि के सामने रखें। तीसरा दीपक प्रवेश द्वार के पास जलाएं। चौथा दीपक तुलसी के पौधे के पास और पांचवां रसोई घर में किसी साफ और सुरक्षित जगह पर रखें।
छठा दीपक पानी के मटके या फिल्टर के पास जलाया जाता है। सातवां दीपक उस जगह रखें जहां घर के पैसे और गहने रखे जाते हैं। आठवां दीपक छत या बालकनी में, नौवां खिड़की के पास और दसवां घर के किसी खुले हिस्से में जलाएं। ग्यारहवां दीपक अनाज या खाने-पीने का सामान रखने वाली जगह पर रखें। बारहवां दीपक घर के बीच वाले हिस्से में और तेरहवां दीपक पीपल के पेड़ के पास जलाने की परंपरा बताई जाती है।
यम दीप किस दिशा में जलाना चाहिए?
धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि इस दीपक को जलाने से परिवार के लोगों को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षा और लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
क्या है यम दीप से जुड़ी पौराणिक कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के बेटे की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। जब उसकी पत्नी को यह बात पता चली, तो उसने उस रात घर के बाहर दीपक जलाए और सोने-चांदी के गहने एक जगह रख दिए। मान्यता है कि दीपक की रोशनी और गहनों की चमक से यमराज का ध्यान भटक गया और राजकुमार के प्राण बच गए। इसी कथा से धनतेरस पर यम दीप जलाने की परंपरा को जोड़ा जाता है।
यम दीप जलाने की विधि और जरूरी नियम
यम दीपदान शाम के समय प्रदोष काल में करने की परंपरा है। इसके लिए मिट्टी का दीपक लें और उसमें चार बत्तियां लगाएं। दीपक में तेल या घी डालकर यमराज का स्मरण करें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घर के बाहर सुरक्षित जगह पर दीपक रखें। परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और कुशलता की प्रार्थना करें।