Gardening Tips: फूलों वाले पौधों पर महंगी खाद डालने की जरूरत नहीं, रसोई की इन 5 चीजों से करें गार्डन की देखभाल

News Desk

Gardening Tips: घर में खाना बनाते समय निकलने वाली कई चीजें गार्डनिंग में काम आ सकती हैं। चावल का पानी, प्याज और केले के छिलके, इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती से मिट्टी को कुछ पोषक तत्व मिल सकते हैं। बस इनका इस्तेमाल सही मात्रा में करें, क्योंकि हर चीज हर पौधे के लिए अच्छी नहीं होती।इसलिए इनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में और सावधानी से करना चाहिए।

चावल धोने का पानी

चावल धोने के बाद बचा सादा पानी कभी-कभी पौधों में डाल सकते हैं। ध्यान रखें कि पानी में नमक, तेल या मसाले न हों। इसे जमा करके न रखें और ज्यादा मात्रा में भी न डालें, क्योंकि गमले में पानी भरने से जड़ें खराब हो सकती हैं।

प्याज के छिलकों से तैयार करें पानी

प्याज के सूखे छिलकों को साफ पानी में कुछ घंटों के लिए भिगो दें। इसके बाद पानी को छानकर सीमित मात्रा में मिट्टी में डाल सकते हैं। छिलकों में कुछ खनिज और जैविक पदार्थ होते हैं, लेकिन इस पानी को संपूर्ण खाद का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

केले के छिलकों का पाउडर

केले के छिलकों में पोटैशियम समेत कुछ खनिज मौजूद होते हैं। इन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर पूरी तरह सुखाएं और फिर पीस लें। तैयार पाउडर की थोड़ी मात्रा मिट्टी में मिलाई जा सकती है।

नींबू के छिलके का इस्तेमाल सावधानी से

नींबू के छिलकों को सीधे गमले की मिट्टी में ज्यादा मात्रा में दबाना सही नहीं है। इनके सड़ने से मिट्टी में गंध और कीटों की समस्या हो सकती है। नींबू की खटास मिट्टी का पीएच भी प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे चींटियां भगाने या मिट्टी का पीएच संतुलित करने का भरोसेमंद उपाय न मानें।

इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती

चाय बनाने के बाद बची पत्ती को अच्छी तरह धोकर उसमें मौजूद दूध और चीनी के अवशेष हटा दें। फिर इसे पूरी तरह सुखाकर थोड़ी मात्रा में कंपोस्ट में मिलाएं। सीधे गमले में ज्यादा चाय पत्ती डालने से नमी और फफूंद की समस्या हो सकती है। इसलिए सीमित इस्तेमाल करना बेहतर है।

खाद डालने से पहले जानें पौधे की जरूरत

घरेलू खाद पौधों की देखभाल में मदद कर सकती है, लेकिन हर पौधे को पोषक तत्वों की जरूरत अलग होती है। फूलों की अच्छी बढ़वार के लिए पर्याप्त रोशनी, सही पानी, जल निकासी और संतुलित पोषण भी जरूरी हैं। घरेलू उपायों को पूरी खाद का विकल्प न बनाएं और पौधे की स्थिति देखकर ही इनका इस्तेमाल करें।

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