Health: ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट सामान्य आने पर कई लोग मान लेते हैं कि उनका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि, हार्ट अटैक का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें उम्र, परिवार में हृदय रोग का इतिहास, धूम्रपान, डायबिटीज और कुछ ऐसे जोखिम भी शामिल हैं, जिनका पता सामान्य जांच से नहीं चलता। इन्हीं में से एक है लिपोप्रोटीन (a), जिसे Lp(a) कहा जाता है। खून में इसका स्तर अधिक होने पर हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
क्या है लिपोप्रोटीन (a)?
लिपोप्रोटीन (a) खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का कण है, जिसमें वसा और प्रोटीन मौजूद होते हैं। इसकी संरचना LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल से मिलती-जुलती है। इसका स्तर अधिक होने पर धमनियों में प्लाक बनने और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इसे हर मामले में LDL से ज्यादा खतरनाक कहना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों का असर व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
जेनेटिक्स से जुड़ा होता है इसका स्तर
Lp(a) का स्तर काफी हद तक आनुवंशिक होता है। यानी माता-पिता से मिले जीन इसकी मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों का वजन सामान्य होने, नियमित व्यायाम करने और संतुलित खानपान के बावजूद इसका स्तर बढ़ा हुआ मिल सकता है। जीवनशैली दिल की सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन इससे Lp(a) का स्तर हमेशा सामान्य नहीं किया जा सकता।
सामान्य लिपिड प्रोफाइल से नहीं चलता पता
रूटीन लिपिड प्रोफाइल में कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। इसमें Lp(a) का स्तर आमतौर पर शामिल नहीं होता। इसे जानने के लिए अलग ब्लड टेस्ट कराना पड़ता है। कई अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों में वयस्कों को जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच पर विचार करने की सलाह दी गई है, खासकर जब परिवार में कम उम्र में हृदय रोग होने का इतिहास हो।
रिपोर्ट में कितनी मात्रा मानी जाती है ज्यादा?
Lp(a) की रिपोर्ट को समझने के लिए उसकी यूनिट देखना जरूरी है। कई दिशानिर्देशों में 50 mg/dL या 125 nmol/L से अधिक स्तर को बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा माना जाता है। वहीं, 30 mg/dL से कम स्तर को आमतौर पर कम जोखिम वाला माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग यूनिट को सीधे एक-दूसरे में बदलना सही नहीं है। रिपोर्ट का अर्थ डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, दूसरी जांचों और पारिवारिक इतिहास के साथ समझते हैं।
स्तर बढ़ा हो तो क्या करें?
Lp(a) अधिक आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। फिलहाल इसका प्रबंधन मुख्य रूप से दूसरे नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिमों पर ध्यान देकर किया जाता है। LDL को उचित स्तर पर रखना, ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित करना, धूम्रपान छोड़ना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार अपनाना उपयोगी कदम हैं। दवाओं या किसी खास उपचार की जरूरत है या नहीं, यह डॉक्टर तय करेंगे।