हिंदू धर्म में कार्तिक महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है। इस साल कार्तिक माह की शुरुआत 27 अक्टूबर 2026 से हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य मिलता है।
रमा एकादशी स्नान 5 नवंबर
कार्तिक महीने का पहला प्रमुख स्नान रमा एकादशी पर 5 नवंबर, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और स्नान-दान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी चीजें जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं।
रूप चतुर्दशी, 7 नवंबर
रूप चतुर्दशी या रूप चौदस 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इसे अभ्यंग स्नान से भी जोड़ा जाता है। इस दिन परंपरा के अनुसार तिल के तेल से मालिश और उबटन लगाने के बाद स्नान किया जाता है। मान्यता है कि इससे तन-मन की शुद्धि होती है। इस अवसर पर जरूरतमंदों को वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान की जा सकती है।
कार्तिक अमावस्या, 9 नवंबर
कार्तिक अमावस्या इस बार 9 नवंबर, सोमवार को पड़ रही है। सोमवार को अमावस्या होने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या पर पवित्र स्नान, पितरों के निमित्त दान और जरूरतमंदों की सहायता को महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन चावल, गेहूं, तिल या वस्त्र दान किए जा सकते हैं।
देवउठनी एकादशी, 20 नवंबर
देवउठनी एकादशी 20 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। इसके बाद विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। श्रद्धालु इस दिन स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं और अन्न, घी या तुलसी का पौधा दान कर सकते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा, 24 नवंबर
कार्तिक महीने का प्रमुख स्नान 24 नवंबर, मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर होगा। इस दिन पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान, दीपदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। वाराणसी में इसी अवसर पर देव दीपावली भी मनाई जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल या जरूरत की दूसरी वस्तुएं दान कर सकते हैं।
कार्तिक स्नान के बाद क्या करें दान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक स्नान के बाद गर्म कपड़े, कंबल, शॉल, तिल, गुड़, चावल, गेहूं, जौ, बाजरा, आंवला, देसी घी, दूध, दही और तुलसी का पौधा दान करना शुभ माना जाता है। दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
दान से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प करने की परंपरा है। इसके बाद वस्तुएं किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दी जा सकती हैं। इन उपायों से मिलने वाले पुण्य और मोक्ष से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।