इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Politics News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम की रिमूवल कार्रवाई के खिलाफ ठेला संचालकों के समर्थन में उतरने वाले क्षेत्रीय पार्षद कुणाल सोलंकी अब खुद चौतरफा विवादों और संगीन आरोपों के घेरे में आ गए हैं। निगम की जब्ती गाड़ी के आगे धरना देकर अचानक चर्चा में आए पार्षद कुणाल सोलंकी पर भाजपा के मध्य प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने बेहद गंभीर आरोप जड़े हैं। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया है कि ठेला चालकों की हमदर्दी की आड़ में पार्षद का अपना निजी स्वार्थ छुपा है और वे प्रति ठेला रोजाना 200 रुपये की कथित वसूली करवा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और पार्षद ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
200 रुपये रोज वसूली और 14 अवैध कॉलोनियों का दावा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने एक प्रेस बयान में सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि जिन ठेला संचालकों के समर्थन का ढोंग रचकर पार्षद सोलंकी निगम की गाड़ी के सामने बैठे थे, उन्हीं गरीब ठेले वालों से रोजाना 200 रुपये की अवैध उगाही की जाती है। प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि जब रोजाना की मोटी रकम आ रही है, तो कार्रवाई होने पर हायतौबा मचाना स्वाभाविक है।
इसके अलावा भाजपा नेता ने पार्षद कुणाल सोलंकी पर कई और बड़े खुलासे किए:
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आलीशान बंगले पर सवाल: पार्षद अपने निर्वाचित वार्ड में न रहकर ‘राव कॉलोनी’ स्थित एक आलीशान बंगले में रहते हैं।
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अवैध कॉलोनियों को संरक्षण: पार्षद बनने के बाद से संबंधित क्षेत्र में करीब 14 अवैध कॉलोनियां बसवाई गईं।
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गोडाउन निर्माण का खेल: क्षेत्र में अवैध गोडाउन का निर्माण कराने के नाम पर कथित तौर पर 3 लाख रुपये ऐंठने का भी आरोप लगाया गया है।
हॉकर जोन पर चुप्पी और चुनावी राजनीति
विवाद का दूसरा सबसे बड़ा पहलू हॉकर जोन की व्यवस्था को लेकर है। पार्षद कुणाल सोलंकी ने दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 2022 में हॉकर जोन बनाने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन 2026 तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इस पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि ठेला चालकों का स्थायी व्यवस्थापन इतना ही महत्वपूर्ण मुद्दा था, तो पिछले चार सालों में महापौर या निगम आयुक्त का घेराव कर लगातार बड़ा आंदोलन क्यों नहीं चलाया गया? चुनाव से ठीक छह महीने पहले अचानक इस तरह धरना देना महज एक राजनीतिक स्टंट है।
आरोपों पर पार्षद ने साधी चुप्पी, पुलिस कर सकती है एफआईआर
इन संगीन दावों के बीच जब मीडिया ने पार्षद कुणाल सोलंकी से फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने आरोपों पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। पार्षद ने कहा कि वह अब इस पूरे विषय पर कोई भी बयान देना बंद कर चुके हैं।
उधर, पुलिस और निगम प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि रिमूवल कार्रवाई के दौरान निगम की गाड़ी के सामने बैठकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने को लेकर यदि नगर निगम प्रशासन द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो पार्षद कुणाल सोलंकी के खिलाफ ‘सरकारी कार्य में बाधा’ (Obstruction to Public Servant) का आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा।
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नगरीय निकाय चुनाव से महज छह माह पहले उठे इस बड़े सियासी बवंडर ने इंदौर की राजनीति में गर्माहट ला दी है। अब देखना होगा कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन इन लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या मामला राजनीतिक जुबानी जंग तक ही सीमित रहता है।