रीवा। Nishaanebaz.com-Rewa Durga Idol Unsold Crisis: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में नवरात्रि का पावन पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन इस उत्सव के पीछे की एक दर्दनाक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। शहर में कुछ स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रखी अनबिकी दुर्गा प्रतिमाएं अब बंगाल से आए कारीगरों और स्थानीय कारोबारियों के टूटे सपनों की दास्तान बयां कर रही हैं। महीनों की कड़ी मेहनत, खून-पसीने और हुनर के दम पर तैयार की गईं ये भव्य प्रतिमाएं उचित खरीदार न मिलने के कारण अब यूं ही लावारिस हालत में पड़ी हैं, जिससे धार्मिक आस्था और लोगों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंच रही है।
बाहरी राज्यों विशेषकर बंगाल के कारीगरों को बुलाकर बड़े पैमाने पर कारोबार शुरू करने वाले इन मूर्तिकारों की उम्मीदों पर इस बार पानी फेर दिया है। त्योहार के दौरान अपेक्षित बिक्री नहीं होने के कारण दर्जनों प्रतिमाएं बिकने से रह गईं। अब हालात यह हैं कि ये प्रतिमाएं खुले में रहने के कारण धूप, धूल और मौसम की मार झेल रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि खुले स्थान पर होने के कारण वहां मवेशियों व जानवरों के पहुंचने का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे पवित्र प्रतिमाओं के अनादर की आशंका ने लोगों को व्यथित कर दिया है।
कारीगरों और कारोबारियों के सामने अब इन अनबिकी प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने, उनकी देखरेख करने और नियमानुसार उनका सम्मानजनक विसर्जन कराने की बड़ी चुनौती आन खड़ी है। पहले ही लागत का भारी बोझ झेल रहे इन गरीब शिल्पकारों पर अब इस अतिरिक्त आर्थिक भार और प्रबंधन की समस्या ने दोहरी मार दी है। जिस मां दुर्गा की प्रतिमा की कुछ दिन पहले ही विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गई थी, उन्हें पर्व समाप्ति के बाद इस तरह उपेक्षित हाल में देखना हर धर्मप्रेमी नागरिक को झकझोर रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार संस्थाएं हरकत में आ गई हैं। मानस भवन कमेटी के अध्यक्ष सुभाष पांडे ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि संबंधित मूर्तिकारों से बातचीत कर ली गई है और उन्हें अगले कुछ दिनों में मूर्तियों को वहां से हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सबसे पहले उन कारीगरों को चिन्हित किया जाएगा जिनके द्वारा ये मूर्तियां बनाई गई हैं।
निगमायुक्त अक्षत जैन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उन कारीगरों को ही सम्मानजनक तरीके से मूर्तियों को सुरक्षित रखने या नियमानुसार विसर्जित करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। यदि कारीगर नहीं मिलते हैं या वे असमर्थ रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में नगर निगम प्रशासन खुद कोई वैकल्पिक रास्ता निकालेगा, ताकि किसी भी सूरत में लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं का अपमान न हो सके।
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इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर त्योहारों के समय स्थानीय स्तर पर कला और कारीगरों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सतह पर ला दिया है। प्रशासन के त्वरित हस्तक्षेप के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि इन प्रतिमाओं का विसर्जन और रखरखाव पूरी गरिमा के साथ सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे शहरवासियों की आहत आस्था को कुछ हद तक सांत्वना मिल सकेगी।