PAN Card Fraud: न करोड़ों की कमाई, न बड़ा कारोबार… फिर भी 4 करोड़ का टैक्स नोटिस! कहीं आपके PAN पर भी तो नहीं खेल?

Sanjay Sahu
PAN Card Fraud

PAN Card Fraud: नई दिल्ली। कल्पना कीजिए, आपकी कमाई इतनी भी नहीं है कि आपको इनकम टैक्स देना पड़े, लेकिन अचानक आयकर विभाग करोड़ों रुपये के लेनदेन का हिसाब मांगने लगे। ऐसी स्थिति में कोई भी परेशान हो सकता है। दिल्ली में होटल अशोका में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कुक ललित के साथ ऐसा ही मामला सामने आया, जहां उनके पैन कार्ड से कथित तौर पर 24.62 करोड़ रुपये की नकद बिक्री का रिकॉर्ड जुड़ा मिला। इसके आधार पर उनके खिलाफ करीब 4 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड की गई।

ललित ने इन लेनदेन से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया और पहचान की चोरी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। 6 अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट ने स्वतंत्र सबूतों की कमी समेत कई आधारों पर टैक्स डिमांड रद्द कर दी। हालांकि, अदालत ने कानून के तहत समय-सीमा के भीतर ठोस सबूत मिलने पर नए सिरे से कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया।

PAN Card Fraud: कैसे एक कुक के PAN पर दर्ज हुआ करोड़ों का लेनदेन?

रिपोर्ट के मुताबिक, ललित को 26 फरवरी 2024 को आयकर विभाग से नोटिस मिला था। इसमें एक पैकेजिंग मटेरियल कंपनी के जरिए 24.62 करोड़ रुपये की कथित नकद बिक्री का रिकॉर्ड उनके पैन से जुड़ा बताया गया था। विभाग ने इसी आधार पर टैक्स और जुर्माने की मांग की।

ललित का कहना था कि न तो उन्होंने इतना बड़ा कारोबार किया और न ही उनका संबंधित कंपनी से कोई संबंध था। उन्होंने अपना फॉर्म 26AS चेक किया, जिसमें उनके पैन से जुड़ी कथित बिक्री और उस पर टीडीएस दर्ज था। इसके बाद उन्होंने पुलिस और साइबर सेल में पहचान की चोरी की शिकायत दर्ज कराई।

हाई कोर्ट ने क्यों रद्द की करीब ₹4 करोड़ की टैक्स डिमांड?

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आयकर विभाग की ओर से ऐसा स्वतंत्र साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जो कथित कारोबार और ललित के बीच संबंध स्थापित कर सके। अदालत ने कंपनी की स्वतंत्र जांच और उसके मालिक का बयान दर्ज किए जाने से जुड़े पहलुओं पर भी गौर किया।

मामले में एक ही लेनदेन के ग्रॉस और नेट आंकड़ों को दो बार गिनने की गड़बड़ी का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने ललित की नौकरी, आर्थिक स्थिति और उनके स्पष्टीकरण पर भी विचार किया। इन आधारों पर टैक्स डिमांड रद्द कर दी गई।

कहीं आपके PAN का भी तो नहीं हो रहा गलत इस्तेमाल?

पैन कार्ड का अनधिकृत इस्तेमाल होने का पता कई बार तब चलता है, जब टैक्स रिकॉर्ड में कोई अनजान वित्तीय लेनदेन दिखाई देता है या आयकर विभाग का नोटिस मिलता है। इसलिए समय-समय पर अपने टैक्स रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है।

1\. फॉर्म 26AS चेक करें

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपना फॉर्म 26AS देखें। इसमें पैन से जुड़ी टैक्स कटौती और जमा टैक्स सहित संबंधित जानकारी मिलती है। अगर कोई ऐसा लेनदेन या टीडीएस दिखाई देता है, जिससे आपका संबंध नहीं है, तो उसकी जांच करें।

2\. Annual Information Statement (AIS) देखें

AIS में विभिन्न वित्तीय लेनदेन की जानकारी उपलब्ध होती है। इसमें अनजान बिक्री, रसीद या अन्य वित्तीय गतिविधि दिखाई देने पर संबंधित रिकॉर्ड और अपने दस्तावेजों का मिलान करें।

3\. GST पोर्टल पर PAN से जुड़ा रजिस्ट्रेशन जांचें

GST पोर्टल पर उपलब्ध ‘Search by PAN’ सुविधा से पता लगाया जा सकता है कि आपके पैन से कौन-कौन से जीएसटी रजिस्ट्रेशन जुड़े हैं। यदि कोई ऐसा रजिस्ट्रेशन दिखाई दे, जिससे आपका कोई संबंध नहीं है, तो संबंधित विभाग से संपर्क करें।

PAN Card Fraud: PAN के गलत इस्तेमाल का शक हो तो क्या करें?

अगर आपके पैन से जुड़ा कोई संदिग्ध लेनदेन सामने आता है, तो घबराने के बजाय जरूरी कदम उठाएं।

– सबूत सुरक्षित रखें: संबंधित टैक्स रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां संभालकर रखें।
– पुलिस या साइबर सेल में शिकायत करें: पहचान की चोरी या अनधिकृत इस्तेमाल का संदेह होने पर शिकायत दर्ज कराएं।
– आयकर विभाग को लिखित जानकारी दें: संबंधित अधिकारी को स्पष्ट रूप से बताएं कि विवादित लेनदेन आपका नहीं है। उपलब्ध सबूत और शिकायत की प्रति भी संलग्न करें।
– बैंक और नौकरी के रिकॉर्ड संभालें: बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, पीएफ रिकॉर्ड और नौकरी से जुड़े दस्तावेज आपकी वास्तविक आर्थिक स्थिति स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।
– टैक्स नोटिस का जवाब जरूर दें: नोटिस को नजरअंदाज न करें। निर्धारित समय-सीमा में जवाब दें और जरूरत पड़ने पर टैक्स विशेषज्ञ या वकील की मदद लें।

PAN Card Fraud: टैक्स रिकॉर्ड की नियमित जांच क्यों है जरूरी?

PAN Card Fraud: यह मामला बताता है कि पैन से जुड़ी गलत जानकारी किसी व्यक्ति को बड़ी आर्थिक और कानूनी परेशानी में डाल सकती है। हालांकि, टैक्स रिकॉर्ड में हर अनजान एंट्री धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं होती। कभी-कभी रिकॉर्ड में गलती या जानकारी के मिलान से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इसलिए फॉर्म 26AS, AIS और पैन से जुड़े जीएसटी रजिस्ट्रेशन की समय-समय पर जांच करें। अगर कोई संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो दस्तावेजों के साथ संबंधित विभाग को समय पर जानकारी दें। याद रखें, टैक्स नोटिस मिलने पर चुप रहना या उसे नजरअंदाज करना समस्या बढ़ा सकता है।

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