Rewa Royal Family Tradition: देश की इकलौता रियासत जहां राजा गद्दी पर नहीं बैठते! भगवान विष्णु को समर्पित है रीवा राजघराने की राजगद्दी

VIKASH KHALKHO

रीवा/विंध्य। Nishaanebaz.com-Rewa Royal Family Tradition: राजा-महाराजाओं के शाही ठाट-बाट और वैभव के इतिहास में राजगद्दी (सिंहासन) का अपना एक विशेष और सर्वोच्च स्थान होता है। इतिहास गवाह है कि सत्ता और अधिकार की इस गद्दी को पाने के लिए अपनों ने ही अपनों से जंग लड़ी है। लेकिन, मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल में स्थित रीवा रियासत देश की एक ऐसी इकलौती और अनूठी रियासत है, जहां के महाराजाओं ने कभी भी इस राजगद्दी पर बैठने की इच्छा नहीं रखी। बघेल रियासत के लगभग 350 वर्षों के वैभवशाली इतिहास में रीवा के किसी भी महाराज ने इस गद्दी का उपभोग नहीं किया, बल्कि राजगद्दी को हमेशा ‘राजाधिराज भगवान विष्णु’ का आसन माना और उनके सामने सिर झुकाकर सिर्फ पूजा की है।

350 वर्षों से चली आ रही है यह अनूठी परंपरा

रीवा रियासत का इतिहास अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इस रियासत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सदियों से यह परंपरा चली आ रही है कि गद्दी पर कोई राजा या महाराजा नहीं, बल्कि साक्षात राजाधिराज भगवान विराजमान होते हैं। रियासत के राजाओं ने इस सिंहासन को भगवान का पवित्र आसन मानकर इसके प्रति अपनी अगाध श्रद्धा दिखाई। इतने वर्ष बीत जाने और देश में राजशाही खत्म होने के बाद भी रीवा राजघराने की यह परंपरा आज भी पूरी तन्मयता के साथ कायम है।

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दशहरे के दिन महाराज पुष्पराज सिंह ने की विधि-विधान से गद्दी पूजा

विजयादशमी के पावन पर्व पर रीवा रियासत के वर्तमान महाराज पुष्पराज सिंह ने वर्षों से चली आ रही इस महान परंपरा का पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निर्वाह किया। दशहरे के दिन विशेष अनुष्ठान के तहत रीवा राजमहल में राजगद्दी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान महाराज ने भगवान को नमन किया और राजघराने की इस ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए रखा।

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नीलकंठ छोड़-कर दी नगरवासियों को शुभकामनाएं

गद्दी पूजा और पूजन अनुष्ठान संपन्न होने के बाद रीवा रियासत के महाराज पुष्पराज सिंह ने परंपरा के अनुसार ‘नीलकंठ’ छोड़ा, जिसे हिंदू संस्कृति में बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस अवसर पर महाराज ने प्रदेश और देशवासियों को विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा भगवान से सभी नागरिकों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। रीवा की यह अनूठी परंपरा आज भी लोगों के बीच गहरी आस्था और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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