इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Ravana Temple Petition: देश भर में विजयादशमी के पावन पर्व पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले दहन की तैयारियां जोरों पर होती हैं, वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद अनूठा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इंदौर के परदेशीपुरा स्थित प्रसिद्ध रावण मंदिर के पुजारी महेश गौहर ने रावण दहन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटایا है। पुजारी का दावा है कि देशभर में बड़े पैमाने पर रावण के पुतले जलाए जाने से वातावरण दूषित हो रहा है, पानी की किल्लत बढ़ रही है और इसी वजह से इंदौर में ढंग से बारिश नहीं हो रही है।
प्राचीन ग्रंथों का हवाला और रावण दहन पर सवाल
याचिकाकर्ता पुजारी महेश गौहर ने अपनी कानूनी याचिका में प्राचीन धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए यह तर्क दिया है कि शास्त्रों और पुराने ग्रंथों में कहीं भी रावण दहन का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। उनका तर्क है कि पुतले जलाने की परंपरा से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है और यदि इस पर रोक लगाई जाए, तो न केवल वातावरण शुद्ध होगा बल्कि अच्छी बारिश और बेहतर प्राकृतिक माहौल भी देखने को मिलेगा। इस याचिका पर पूर्व में 26 सितंबर को सुनवाई हुई थी और अब मामले में अगली सुनवाई की प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
जहाँ जलते हैं पुतले, वहीं इंदौर के इस मंदिर में होती है रावण की विशेष पूजा
दिलचस्प बात यह है कि परदेशीपुरा स्थित यह रावण मंदिर शहर की अन्य धार्मिक जगहों से बिल्कुल अलग पहचान रखता है। जहां एक ओर विजयादशमी के दिन चारों तरफ रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं इस मंदिर में रावण की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और विशेष हवन किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना 10 अक्टूबर 2010 को सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर पूरी की गई थी। विजयादशमी के अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर मन्नत का धागा बांधते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
आस्था बनाम परंपरा: क्या अदालत लेगी कोई बड़ा फैसला
यह पूरा मामला अब ‘आस्था बनाम परंपरा’ और ‘पर्यावरण बनाम संस्कृति’ के बीच एक बड़ी बहस बन गया है। एक तरफ जहां सदियों से रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं और पर्यावरण संरक्षण का हवाला देकर कानूनी लड़ाई शुरू की गई है। हालांकि, केवल याचिका दायर होने से रावण दहन पर स्वतः रोक लगना संभव नहीं है, लेकिन इस अनोखे मुकदमे ने समाज और न्यायपालिका दोनों का ध्यान अपनी ओर जरूर खींच लिया है। अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है, यह आगामी सुनवाइयों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।