दंतेवाड़ा / रायपुर। Nishaanebaz.com-Bastar Sewa Sankalp Abhiyan: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दशकों तक फैले नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब वहां के पीड़ित परिवारों के जीवन में नई रोशनी लाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर पुनर्वास अभियान शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित एक भव्य निःशुल्क शिविर में नक्सल हिंसा से प्रभावित 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आधुनिक सहायक उपकरण वितरित किए गए। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और लाभार्थियों का हौसला बढ़ाया।
‘नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब उसकी पीड़ा और निशानियों को भी मिटाना है’—अमित शाह
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी (IED) विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया, जो मानवाधिकारों का सबसे बड़ा हनन था।
गृह मंत्री ने कहा कि हमने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। लेकिन केवल नक्सलवाद खत्म कर देने से पांच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी, इसलिए उनके घावों पर मरहम लगाना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर देना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के 768 लोगों को मिला नया जीवन
दंतेवाड़ा जिले में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे इस तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जा रहा है। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। इस शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं के सहकार से किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और स्मार्ट वॉकिंग स्टिक पाकर लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी और आंखों में चमक साफ दिखाई दी। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना और बीजापुर के चंद्रैया सपका ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कृत्रिम अंग मिलने से उन्हें एक नया जीवन और आत्मविश्वास मिला है।
सुरक्षा शिविरों से लेकर ‘सेवा डेरा’ तक बस्तर में विकास की बयार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के बाद अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और रोजगार के द्वार खुल चुके हैं। उन्होंने घोषणा की कि नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान स्थापित किए गए 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को कौशल प्रशिक्षण और आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के इन समन्वित प्रयासों से यह स्पष्ट हो गया है कि बस्तर अब हिंसा के साए से बाहर निकलकर देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

