MP Weather Update: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन मौसम अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के असर से आंधी-बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने गुरुवार को 12 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। राहत की बात यह है कि 10 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम के साफ होने का अनुमान है।मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण कई इलाकों में बारिश हो रही है। बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के कई जिलों में वर्षा दर्ज की गई है। आज सिंगरौली, सीधी, शहडोल, सतना, मैहर, मऊगंज, रीवा, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर और बालाघाट में बारिश हो सकती है।
3 अक्टूबर को हुई मानसून की विदाई
मध्य प्रदेश में इस साल मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी और 3 अक्टूबर को इसकी विदाई हो गई। यानी प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा।इस दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से लगभग 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।हालांकि, बारिश के मामले में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच बड़ा अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।
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25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
मध्य प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, ग्वालियर, राजगढ़, कटनी, शहडोल, श्योपुर, सिंगरौली, सतना, सीधी, मऊगंज, अनूपपुर, उमरिया, बुरहानपुर, मंडला, खरगोन, डिंडोरी, दतिया, गुना, पन्ना, निवाड़ी, भिंड, मैहर, टीकमगढ़, आगर मालवा और छतरपुर शामिल हैं।वहीं प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, विदिशा, रीवा, रायसेन, सीहोर, सागर, सिवनी, शिवपुरी, शाजापुर, अशोकनगर, बालाघाट, मंदसौर, मुरैना, बैतूल, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, नीमच, हरदा, झाबुआ, रतलाम, आलीराजपुर, धार, देवास, दमोह, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा शामिल हैं।
इन जिलों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा
कम बारिश के कारण प्रदेश के 11 जिलों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। इनमें आलीराजपुर, धार और झाबुआ कम बारिश वाले प्रमुख जिलों में शामिल हैं।आंकड़ों के अनुसार, आलीराजपुर में सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो प्रदेश में बारिश की सबसे बड़ी कमी बताई गई है। स्रोत के अनुसार, 11 में से 9 जिले सूखे जैसी स्थिति के करीब पहुंच गए हैं।इनमें इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर प्रभावित बताए गए हैं। वहीं शाजापुर और पांढुर्णा में भी सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 3 प्रतिशत का अंतर बताया गया है।
सोयाबीन-मक्का समेत खरीफ फसलों पर असर
बारिश की कमी का असर केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। कम वर्षा वाले इलाकों में पेयजल की स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इसके साथ ही खरीफ फसलों पर भी बारिश की कमी का असर पड़ने की बात सामने आई है।सोयाबीन, मूंग और मक्का समेत कई खरीफ फसलों को नुकसान होने की जानकारी दी गई है। खासकर जिन इलाकों में मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां खेती पर इसका सीधा असर पड़ा है।
10 अक्टूबर से मौसम साफ होने के आसार
फिलहाल पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश की गतिविधियां जारी हैं। गुरुवार को 12 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने की उम्मीद है।मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है। ऐसे में अगले दो दिनों की बारिश के बाद प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क होने की ओर बढ़ सकता है।






